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कैंसर: एक गंभीर स्वास्थ्य संकट और इसके प्रभाव

कैंसर एक जानलेवा बीमारी है जो न केवल प्रभावित व्यक्ति को, बल्कि उसके परिवार को भी गंभीरता से प्रभावित करती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हर पांच में से एक व्यक्ति को कैंसर होने की संभावना है। इस लेख में कैंसर के बढ़ते मामलों, इसके प्रभाव और दवाओं की उपलब्धता पर चर्चा की गई है। जानें कि कैसे यह बीमारी वैश्विक स्वास्थ्य संकट बनती जा रही है और इसके खिलाफ लड़ाई में क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
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कैंसर का प्रभाव

कैंसर एक जानलेवा बीमारी है, जो न केवल प्रभावित व्यक्ति को, बल्कि उसके परिवार को भी आर्थिक, सामाजिक और भावनात्मक दृष्टि से प्रभावित करती है। यह गंभीर रोग विश्वभर में लाखों लोगों को प्रभावित कर रहा है। भारत में, लगभग 32 लाख लोग पिछले पांच वर्षों से कैंसर से जूझ रहे हैं और अभी भी जीवित हैं। हर साल 15 लाख नए मामले सामने आते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कैंसर के संबंध में चौंकाने वाले आंकड़े प्रस्तुत किए हैं।


कैंसर के आंकड़े

WHO के अनुसार, हर पांच में से एक व्यक्ति को कैंसर होने की संभावना है। यह बीमारी 92% लोगों को प्रभावित करेगी, चाहे वह स्वयं इस बीमारी से ग्रसित हों या उनके परिवार में कोई करीबी सदस्य।


चौंकाने वाली रिपोर्ट

विश्व स्वास्थ्य संगठन की कैंसर कंट्रोल टीम के प्रमुख Dr. Andre Ilbawi ने कहा कि कैंसर के बारे में वर्षों से जो कहानियाँ सुनाई जाती रही हैं, वे वैज्ञानिक प्रगति, नई तकनीकों, नए उपचारों और नई उम्मीदों के बारे में हैं। हालांकि, यह कहानी पूरी नहीं है, क्योंकि कैंसर के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।


इस वर्ष WHO की ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया है कि हर साल कैंसर के 2.06 करोड़ नए मामले सामने आते हैं, जिनमें से 1 करोड़ लोग मृत्यु को प्राप्त करते हैं। 2050 तक यह आंकड़ा बढ़कर 3.5 करोड़ तक पहुंच सकता है। अमीर देशों में ब्रेस्ट कैंसर या बचपन में होने वाले कैंसर से 85% लोग प्रभावित होते हैं, जो कम से कम 5 साल तक जीवित रहते हैं, जबकि गरीब देशों में यह आंकड़ा केवल 30% है।


दवाओं की उपलब्धता

लो और लोअर मीडिल इनकम वाले देशों में कैंसर की 20 आवश्यक दवाओं में से केवल 9% से 54% तक दवाएं उपलब्ध हैं, जबकि अमीर देशों में यह आंकड़ा 68% से 94% के बीच है। 23 देशों में रेडिएशन की सुविधाएं नहीं हैं। सब-सहारा अफ्रीका में कैंसर के बारे में जागरूकता की दर बहुत कम है, जिसके कारण वहां कैंसर से होने वाली मौतों की संख्या सबसे अधिक है।