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क्या आप भी लंबे समय तक बैठते हैं? जानें डीप वेन थ्रोम्बोसिस के खतरे

आजकल की जीवनशैली में लंबे समय तक बैठना एक सामान्य बात बन गई है, लेकिन यह स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) जैसी गंभीर समस्याएं इस आदत के कारण उत्पन्न हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि युवा भी इस समस्या का शिकार हो रहे हैं। जानें DVT क्या है, इसके लक्षण और इससे बचने के उपाय इस लेख में।
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लंबे समय तक बैठने से स्वास्थ्य पर प्रभाव


नई दिल्ली: आजकल ऑफिस में लंबे समय तक काम करना, लगातार स्क्रीन पर ध्यान देना, और घंटों तक बैठे रहना आम बात हो गई है। इन आदतों के कारण भारत में कई लोगों की सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक बैठे रहने से पैरों की नसों में रक्त प्रवाह धीमा हो सकता है।


डीप वेन थ्रोम्बोसिस का खतरा


आजकल लोग अधिकतर समय स्क्रीन के सामने बिताते हैं, जिससे उनकी वैस्कुलर हेल्थ प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों ने बताया है कि डेस्क जॉब, ऑनलाइन गेमिंग, और OTT प्लेटफार्म पर लगातार शो देखने से लोग घंटों तक एक ही स्थिति में रहते हैं। इससे पैरों की नसों में रक्त का प्रवाह धीमा हो जाता है, जिससे डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। वैस्कुलर सोसाइटी ऑफ इंडिया ने इस मुद्दे पर लोगों को जागरूक किया है।


DVT क्या है?


डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर की गहरी नसों में खून का थक्का बन जाता है। यह आमतौर पर पैरों में होता है, जिससे रक्त प्रवाह सामान्य नहीं रहता। यदि इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो यह थक्का फेफड़ों तक पहुंच सकता है, जिससे फेफड़ों की नसों में रुकावट हो सकती है। इससे जान का खतरा भी बढ़ सकता है। पहले इसे बुजुर्गों या अस्पताल में भर्ती मरीजों से जोड़ा जाता था, लेकिन अब यह समस्या युवाओं में भी देखी जा रही है।


शोध के निष्कर्ष


एक वैज्ञानिक अध्ययन में पाया गया है कि जिन लोगों की आदतें लंबे समय तक बैठने की हैं, उनमें वीनस थ्रोम्बोएम्बोलिज़्म (VTE) का जोखिम 24 प्रतिशत अधिक होता है। इस स्थिति में नसों में खून के थक्के बनने की समस्या होती है। शोध में यह भी बताया गया है कि लंबे समय तक बैठने से डीप वेन थ्रोम्बोसिस का खतरा बढ़ता है।


डॉ. तापिश साहू, जो वैस्कुलर और एंडोवैस्कुलर सर्जरी विभाग के निदेशक हैं, ने कहा कि आउटपेशेंट डिपार्टमेंट (OPD) में युवा मरीजों में ऐसे लक्षण बढ़ रहे हैं, जिनका मुख्य कारण अत्यधिक स्क्रीन समय और एक ही स्थान पर लंबे समय तक बैठना है।