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डायबिटीज और त्वचा स्वास्थ्य: जानें कैसे रखें अपनी त्वचा का ख्याल

डायबिटीज एक गंभीर बीमारी है जो त्वचा को भी प्रभावित कर सकती है। भारत में 101 मिलियन लोग इस बीमारी से ग्रसित हैं। उच्च रक्त शर्करा के कारण त्वचा में सूखापन, खुजली और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। प्री डायबिटीक मरीजों में भी त्वचा में बदलाव आ सकते हैं। इस लेख में जानें कि कैसे डायबिटीज से प्रभावित त्वचा की देखभाल करें और संक्रमण के जोखिम को कम करें।
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डायबिटीज का प्रभाव

डायबिटीज एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। ICMR-INDIAB की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 101 मिलियन लोग इस बीमारी से ग्रसित हैं। यदि डायबिटीज में उच्च रक्त शर्करा को नियंत्रित नहीं किया जाता है, तो यह शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकता है। डायबिटिक रोगियों में त्वचा संक्रमण का खतरा अधिक होता है।


त्वचा पर डायबिटीज का असर

डायबिटीज कई तरीकों से त्वचा को प्रभावित कर सकता है, विशेषकर जब रक्त शर्करा का स्तर लंबे समय तक उच्च रहता है। रक्त में ग्लूकोज की अधिकता से त्वचा में सूखापन और खुजली की समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसके अलावा, डायबिटीज रक्त संचार और नसों की कार्यक्षमता को भी प्रभावित करता है, जिससे चोट या घाव भरने में अधिक समय लगता है। कुछ व्यक्तियों की त्वचा पर धब्बे भी बन सकते हैं, और बार-बार खुजली या फुंसी-फोड़े की समस्या हो सकती है। इसलिए, रक्त शर्करा को नियंत्रित रखना अत्यंत आवश्यक है। इस विषय पर हमने बेंगलुरु के एस्टर सीएमआई अस्पताल के वरिष्ठ सलाहकार एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, डॉ. महेश डी.एम से चर्चा की।


प्री डायबिटीक मरीजों के लिए

प्री डायबिटीक मरीज


प्री डायबिटीक मरीजों की त्वचा में कुछ परिवर्तन हो सकते हैं, जो इंसुलिन प्रतिरोध के कारण होते हैं। इनमें सबसे सामान्य एकेंथोसिस निग्रिकन्स है, जिसमें त्वचा का रंग गहरा और मोटा हो जाता है, खासकर गर्दन, कांख और जांघ के आस-पास। कुछ व्यक्तियों को त्वचा में सूखापन और बार-बार संक्रमण की समस्या भी हो सकती है। यदि किसी की त्वचा असामान्य रूप से गहरी और मोटी हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।


डायबिटीक मरीजों में संक्रमण का खतरा

डायबिटीक मरीज में हाथ-पैर के संक्रमण का खतरा क्यों होता है


डायबिटीज से ग्रसित व्यक्तियों को स्किन संक्रमण का अधिक खतरा होता है, क्योंकि उच्च रक्त शर्करा से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो सकती है और रक्त संचार प्रभावित होता है। रक्त संचार में कमी के कारण चोट वाली जगह पर ऑक्सीजन और पोषक तत्वों का पहुंचना और घाव का भरना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा, नसों में संवेदनशीलता भी कम हो जाती है, जिससे छोटे-मोटे चोटों का पता नहीं चलता और इनसे बैक्टीरिया और फंगस शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। पैरों और पैरों के निचले हिस्से में रक्त संचार और नसों से संबंधित समस्याएं आम होती हैं। इसलिए, त्वचा को साफ और सूखा रखना चाहिए और घाव का तुरंत उपचार कराना चाहिए ताकि संक्रमण का खतरा कम किया जा सके।


त्वचा की देखभाल के उपाय

कैसे नियंत्रित कर सकते हैं?


सबसे महत्वपूर्ण है रक्त शर्करा को नियंत्रित रखना। डायबिटीज के मरीजों को अपनी त्वचा को साफ और मॉइस्चराइज रखना चाहिए। गर्म पानी से बचें और आरामदायक, सही आकार के जूते पहनें। खुजली वाली जगहों को खरोंचने से बचें। यदि घाव ठीक नहीं हो रहा है, उसमें दर्द, लालिमा, सूजन या तरल पदार्थ निकलने की समस्या हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। नियमित व्यायाम करें, संतुलित आहार लें और पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।