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डिमेंशिया के खतरे को 13 साल तक टालने के लिए 3 आदतें सुधारें

एक नए अध्ययन में यह बताया गया है कि यदि मध्य आयु में उच्च रक्तचाप, टाइप-2 मधुमेह और धूम्रपान को नियंत्रित किया जाए, तो डिमेंशिया की शुरुआत को औसतन 13 वर्ष तक टाला जा सकता है। अध्ययन में 12,400 से अधिक लोगों के स्वास्थ्य आंकड़ों का विश्लेषण किया गया, जिसमें यह पाया गया कि स्वस्थ आदतें अपनाने से मस्तिष्क के दीर्घकालिक स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है। जानें इस अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष और अपने जीवन में सुधार लाने के उपाय।
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नई दिल्ली में अध्ययन के निष्कर्ष

नई दिल्ली: एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के अनुसार, यदि मध्य आयु में उच्च रक्तचाप, टाइप-2 मधुमेह और धूम्रपान को नियंत्रित किया जाए, तो डिमेंशिया की शुरुआत को औसतन 13 वर्ष तक टाला जा सकता है।


यह अध्ययन अमेरिकी मेडिकल जर्नल 'न्यूरोलॉजी' में प्रकाशित हुआ है, जिसमें 12,400 से अधिक व्यक्तियों के स्वास्थ्य डेटा का लगभग 26 वर्षों तक विश्लेषण किया गया। अध्ययन के प्रारंभ में प्रतिभागियों की औसत आयु 56 वर्ष थी। फॉलो-अप के दौरान 3,000 से अधिक प्रतिभागियों में डिमेंशिया का विकास हुआ।


शोधकर्ताओं ने देखा कि जिन व्यक्तियों में मध्य आयु के दौरान उच्च रक्तचाप, टाइप-2 मधुमेह और धूम्रपान जैसे जोखिम कारक नहीं थे, वे औसतन 30.1 वर्ष तक डिमेंशिया से मुक्त रहे। इसके विपरीत, जो लोग इन कारकों को नियंत्रित नहीं कर पाए, उनमें डिमेंशिया-मुक्त अवधि केवल लगभग 17 वर्ष रही। इस प्रकार, दोनों समूहों के बीच लगभग 13 वर्षों का अंतर पाया गया।


अध्ययन के प्रमुख लेखक, डॉ. जोसेफ कोरेश, जो एनवाईयू लैंगोन हेल्थ से जुड़े हैं, ने कहा कि डिमेंशिया की प्रक्रिया लक्षणों के प्रकट होने से कई वर्ष पहले शुरू होती है। इसलिए, मध्य आयु में हृदय और रक्त वाहिकाओं से संबंधित जोखिमों को नियंत्रित करना मस्तिष्क के दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।


विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च रक्तचाप और मधुमेह मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जबकि धूम्रपान ऑक्सीडेटिव तनाव और सूजन को बढ़ाकर मस्तिष्क कोशिकाओं पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। इन जोखिमों को कम करने से संज्ञानात्मक क्षमता को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।


हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह स्पष्ट किया है कि डिमेंशिया को पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता, क्योंकि उम्र और आनुवंशिक कारक इसके प्रमुख जोखिम बने रहते हैं। फिर भी, एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर, रक्तचाप और रक्त शर्करा को नियंत्रित रखकर तथा धूम्रपान से बचकर डिमेंशिया के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।


इससे पहले लैंसेट आयोग की रिपोर्ट में भी कहा गया था कि डिमेंशिया के लगभग 45 प्रतिशत मामलों को जीवनशैली और अन्य संशोधित किए जा सकने वाले जोखिम कारकों पर समय रहते नियंत्रण कर रोका या कई वर्षों तक टाला जा सकता है।