दीपिका पादुकोण की प्रेग्नेंसी में बप्पा का आशीर्वाद: जानें उनके ट्रेडिशनल लुक के बारे में
दीपिका और रणवीर का नया सफर
नई दिल्ली: बॉलीवुड के चर्चित जोड़े दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह अपने घर में एक नए सदस्य का स्वागत करने के लिए तैयार हैं। अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी के इस खास मौके पर, यह जोड़ी मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर में बप्पा का आशीर्वाद लेने पहुंची। ठीक उसी तरह जैसे उन्होंने 2024 में अपनी बेटी 'दुआ' के जन्म से पहले मंदिर में दर्शन किए थे। इस धार्मिक यात्रा के दौरान दीपिका का पारंपरिक लुक सभी का ध्यान आकर्षित कर रहा है। उन्होंने अपने बेबी बंप को सादगी और elegance के साथ प्रदर्शित करते हुए एक ऐसा आउटफिट पहना है, जो भारत की 900 साल पुरानी वस्त्र कला का प्रतीक है।
दीपिका का शानदार लुक
मयूर गिरोत्रा के पटोला कुर्ते में छाया मॉम-टू-बी ग्लो
दीपिका ने इस खास अवसर पर फैशन डिजाइनर मयूर गिरोत्रा द्वारा तैयार किया गया एक कस्टम पारंपरिक एन्सेंबल पहना। उनका लुक सिल्क के पटोला प्रिंट पर आधारित था, जिसमें जीवंत रंग और पारंपरिक डिज़ाइन शामिल थे। उन्होंने ढीले-फ्लोई कुर्ते के साथ पर्पल बॉटम और टिश्यू सिल्क का बुना दुपट्टा पहना। दुपट्टे पर नाजुक एप्लिक वर्क ने उनके लुक को और भी खास बना दिया। पर्पल और गोल्डन टोन का यह एथनिक कॉम्बिनेशन उनके मॉम-टू-बी ग्लो को और निखार रहा था।
कुर्ते की विशेषताएँ
बारीक जरदोजी वर्क
दीपिका के इस ट्रेडिशनल कुर्ते की गोल नेकलाइन को एंटीक जरदोजी की बारीक गोल्डन एम्ब्रॉयडरी से सजाया गया था। इसके अलावा, कुर्ते पर पीले, लाल, हरे और सफेद रंगों के मिश्रण से बना पटोला पैटर्न भी आकर्षक था। पारंपरिक क्राफ्ट को आधुनिक सिल्हूट के साथ मिलाने का यह तरीका इसे खास और रॉयल फील देता है। प्रेग्नेंसी फैशन को ध्यान में रखते हुए, डिजाइनर ने कुर्ते की फिटिंग को आरामदायक रखा, ताकि मूवमेंट में आसानी हो और बेबी बंप भी हल्का सा फ्लॉन्ट हो सके।
पटोला की ऐतिहासिकता
गुजरात का 900 साल पुराना ऐतिहासिक पटोला इतिहास
दीपिका का यह आउटफिट केवल फैशन का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह गुजरात की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक भी है। पटोला बुनाई का इतिहास लगभग 900 साल पुराना है, जो विशेष रूप से 11वीं और 12वीं सदी में पाटन के राजघरानों में प्रतिष्ठा का प्रतीक रहा है। पाटन के साल्वी समुदाय के कारीगरों ने इस अद्भुत कला को पीढ़ी-दर-पीढ़ी संजोकर रखा है। पटोला को तैयार करने की प्रक्रिया 'डबल इकत' तकनीक पर आधारित होती है, जो बेहद जटिल और मेहनत भरी होती है। हाथकरघे पर एक साड़ी या कपड़ा तैयार करने में कारीगरों को कई महीनों से लेकर एक साल तक का समय लग सकता है।
