प्रेग्नेंसी और ब्रेस्टफीडिंग के दौरान ब्रेस्ट कैंसर के लक्षणों पर ध्यान दें
मदरहुड पीरियड के दौरान ब्रेस्ट कैंसर का खतरा
मदरहुड का समय हर महिला के लिए विशेष होता है। गर्भावस्था और बच्चे को दूध पिलाने के दौरान महिलाओं के शरीर में कई परिवर्तन होते हैं। इस समय ब्रेस्ट का आकार बढ़ना, भारीपन का अनुभव करना या गांठ जैसी अनुभूति होना सामान्य है।
हालांकि, शरीर में होने वाले इन परिवर्तनों को सामान्य मानकर अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्या आप जानते हैं कि गर्भावस्था और ब्रेस्टफीडिंग के दौरान ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ सकता है? इसके लक्षणों की पहचान करना कठिन हो सकता है। यदि आपको असामान्य गांठ, निप्पल से खून आना, त्वचा में परिवर्तन या लगातार दर्द महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
प्रेग्नेंसी के दौरान ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण
क्या प्रेग्नेंसी और फीडिंग के समय हो सकता है ब्रेस्ट कैंसर?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था और बच्चे को जन्म देने के बाद दूध पिलाने के दौरान ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है। इसे प्रेग्नेंसी-एसोसिएटेड ब्रेस्ट कैंसर कहा जाता है। इस समय ब्रेस्ट में होने वाले सामान्य परिवर्तनों के कारण इसके लक्षणों पर ध्यान देना कठिन हो सकता है। इसलिए, इस अवधि में ब्रेस्ट में होने वाले हर बदलाव को सामान्य मानना गलत है।
ब्रेस्ट कैंसर के लक्षणों की पहचान
ब्रेस्ट कैंसर के किन लक्षणों को न करें नजरअंदाज?
- यदि ब्रेस्ट में कोई असामान्य गांठ महसूस हो रही है, तो डॉक्टर से संपर्क करें।
- निप्पल से खून निकलने की स्थिति में इसे नजरअंदाज न करें।
- ब्रेस्ट की त्वचा में किसी भी असामान्य परिवर्तन पर तुरंत जांच कराएं।
- यदि ब्रेस्ट में लगातार दर्द हो रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लें।
याद रखें, हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन बिना जांच के यह मान लेना सही नहीं है।
जांच की आवश्यकता
क्या प्रेग्नेंसी और फीडिंग के दौरान जांच हो सकती है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई गांठ, दर्द या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से अवश्य संपर्क करें। डॉक्टर महिला की स्थिति और लक्षणों के आधार पर आवश्यक जांच की सलाह दे सकते हैं। गर्भावस्था या ब्रेस्टफीडिंग के कारण जांच को टालना उचित नहीं है।
