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भारत की एआई दौड़ में संभावनाएं और चुनौतियां

केपीएमजी इंडिया के सीईओ येजदी नागपोरवाला ने भारत की एआई क्षमता पर चर्चा की है। उन्होंने वैश्विक एआई कंपनियों के मूल्यांकन मॉडल पर चिंता जताते हुए कहा कि भारत को इस क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर है। जानें उनके विचार और भारत की एआई दौड़ में संभावनाएं।
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भारत की एआई क्षमता पर सीईओ का दृष्टिकोण

केपीएमजी इंडिया के सीईओ येजदी नागपोरवाला ने मंगलवार को वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) कंपनियों के मूल्यांकन मॉडल पर अपनी चिंता व्यक्त की। उनका मानना है कि भले ही भारत एआई की दौड़ में शुरुआत में पीछे रह गया हो, लेकिन देश के पास इस कमी को दूर करने और आगे बढ़ने का पूरा अवसर है।


उन्होंने यह भी कहा कि भारत को अंततः अपना खुद का लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम) विकसित करना होगा। नागपोरवाला ने विश्वास व्यक्त किया कि देश एक ऐसा मॉडल बनाएगा जो तकनीकी परिवेश और वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) की उपस्थिति के कारण पूरी तरह से अलग और अनूठा होगा।


नागपोरवाला ने वैश्विक स्तर पर कुछ प्रमुख एआई कंपनियों के लिए दिए जा रहे उच्च मूल्यांकन पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि इस तरह का मूल्यांकन स्थायी नहीं हो सकता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि आप इन कंपनियों के राजस्व और मूल्यांकन मॉडल का विश्लेषण करें, तो यह मूल्यांकन किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं लगता।


उन्होंने यह भी कहा कि जब इन कंपनियों का राजस्व 50 अरब डॉलर से कम है, तो उनका मूल्यांकन एक हजार अरब डॉलर या उससे अधिक कैसे हो सकता है। जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत एआई की दौड़ में पीछे रह गया है, तो नागपोरवाला ने कहा कि कुछ मामलों में हां, और कुछ में नहीं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि हमारे पास इस अंतर को पाटने और आगे बढ़ने का एक अच्छा अवसर है।