भारत में कोरियन फूड की बढ़ती लोकप्रियता: युवा पीढ़ी का नया कम्फर्ट फूड
कोरियन फूड का उभार
भारत में खान-पान की आदतें तेजी से बदल रही हैं, जहां पारंपरिक स्नैक्स के साथ-साथ वैश्विक स्वाद भी युवाओं के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं। विशेष रूप से Gen-Z के लिए, कोरियन भोजन अब केवल एक शौक नहीं रह गया है, बल्कि यह उनके लिए एक आधिकारिक कम्फर्ट फूड बन चुका है। स्विगी की 'हाउ इंडिया स्विग्ड 2025' रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2025 में भारत में कोरियन खाने के ऑर्डर पिछले वर्ष की तुलना में 50% बढ़ गए हैं, जिसमें Gen-Z की हिस्सेदारी 27% रही है। इसके अलावा, नॉन-मेट्रो शहरों में भी कोरियन फूड ऑर्डर्स में 59% की वृद्धि देखी गई है, और कोरियन बन, रामेन और चिकन सबसे अधिक खोजे जाने वाले आइटम्स में शामिल हैं.
कोरियाई संस्कृति का प्रभाव
कोरियन फूड की इस बढ़ती लोकप्रियता के पीछे कोरियाई मनोरंजन उद्योग का बड़ा योगदान है। आज के युवा कोरियन ड्रामा, फिल्में और गाने बड़े पैमाने पर देख रहे हैं। इन शो में दिखाए जाने वाले स्टीमिंग नूडल्स, लेट-नाइट फ्राइड चिकन और बारिश में खाने वाली चीजें दर्शकों पर गहरा प्रभाव डालती हैं, जिससे वे उस संस्कृति और खान-पान की ओर आकर्षित होते जा रहे हैं.
स्वाद का संगम
कोई भी भोजन तभी लोकप्रिय होता है जब वह स्थानीय लोगों के स्वाद से मेल खाता है। कोरियन खाने में मसालेदार सॉस, लहसुन, तिल और चटपटे मसाले भारतीयों के स्वाद के अनुरूप हैं। भारतीयों को तीखा और चटपटा खाना पसंद है, और यही कारण है कि कोरियन फूड का यह मसालेदार अंदाज युवाओं को तुरंत भाता है. कोरियन खाने का यह मसालेदार तरीका भारतीयों की पसंद के करीब है, जो इसे पूरे देश में तेजी से लोकप्रिय बना रहा है.
सोशल मीडिया का योगदान
कोरियन खाने की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता के पीछे सोशल मीडिया और ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप्स का बड़ा हाथ है। आजकल इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब शॉट्स पर कोरियन स्ट्रीट फूड और नूडल्स की वीडियो हमेशा देखने को मिलती हैं। चीज़ वाले ट्टोकबोक्की और तीखे बुलदक नूडल्स खाने के चैलेंज लोगों को आकर्षित करते हैं, जिससे ये चीजें तुरंत वायरल हो जाती हैं। इसके अलावा, स्विगी जैसे डिलीवरी ऐप्स और स्थानीय दुकानों ने किमची, गोटजुंग और इंस्टेंट रामयेन को इतना सुलभ बना दिया है कि ग्राहकों को अब इसके लिए महंगे रेस्टोरेंट में जाने की आवश्यकता नहीं है.
