भारत में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों की चिंता
भारत में हृदय रोगों का बढ़ता खतरा
भारत में हर 10 व्यक्तियों में से एक की मृत्यु हार्ट अटैक के कारण हो रही है, जो कि एक चिंताजनक स्थिति है। हाल के वर्षों में हृदय रोगों के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। पहले यह माना जाता था कि हार्ट अटैक का खतरा केवल बुजुर्गों को होता है, लेकिन अब यह स्थिति बदल चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत में 27% मौतें कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों के कारण होती हैं।
हृदय रोग के कारण
हृदय रोगों का मुख्य कारण अस्वस्थ खान-पान और गतिहीन जीवनशैली है। इन कारणों से हार्ट में ब्लॉकेज की समस्या उत्पन्न होती है। कई लोग यह सोचते हैं कि हार्ट में ब्लॉकेज का मतलब हार्ट अटैक है, लेकिन यह सही नहीं है। इस विषय पर हमने कल्याण के फोर्टिस अस्पताल के स्ट्रक्चरल कार्डियोलॉजी के निदेशक डॉ. विवेक महाजन से चर्चा की।
दिल में ब्लॉकेज का अर्थ
दिल में ब्लॉकेज का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को हार्ट अटैक आ रहा है। ब्लॉकेज का अर्थ आमतौर पर दिल की धमनियों में चर्बी और प्लाक का जमा होना है, जिससे वे संकरा हो जाती हैं। हार्ट अटैक तब होता है जब दिल की मांसपेशियों तक खून का प्रवाह अचानक कम हो जाता है या रुक जाता है, जिससे दिल की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचता है। - डॉ. विवेक महाजन, हृदय रोग विशेषज्ञ
ब्लॉकेज का पता लगाने के लिए टेस्ट
ब्लॉकेज की पहचान के लिए डॉक्टर मरीज के लक्षणों और जोखिम के आधार पर विभिन्न टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं। इनमें ईसीजी (ECG), इकोकार्डियोग्राफी (Echo), रक्त परीक्षण, स्ट्रेस टेस्ट, सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी और आवश्यकता पड़ने पर पारंपरिक कोरोनरी एंजियोग्राफी शामिल हैं।
हार्ट अटैक के जोखिम को कम करने के उपाय
हार्ट अटैक के खतरे को कम करने के लिए रक्तचाप, मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करना आवश्यक है। धूम्रपान और तंबाकू से बचें, वजन को संतुलित रखें, नियमित व्यायाम करें, संतुलित आहार लें और तनाव को प्रबंधित करें। डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवाओं का नियमित सेवन करें। जिन लोगों को पहले से जोखिम है, उन्हें समय-समय पर स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए।
लक्षणों की अनदेखी न करें
यदि आपको सीने में दबाव या दर्द, सांस लेने में कठिनाई, बिना किसी स्पष्ट कारण के पसीना आना, जी मिचलाना, चक्कर आना या दर्द का बांह, कंधे, पीठ, गर्दन या जबड़े तक फैलना जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इन्हें नजरअंदाज न करें। यदि ये लक्षण अचानक शुरू होते हैं, बहुत तेज होते हैं या लगातार बने रहते हैं, तो तुरंत इमरजेंसी में जाएं। लक्षणों के अपने आप ठीक होने का इंतजार न करें।
