भारत-रूस संबंध: विदेश मंत्री जयशंकर का महत्वपूर्ण बयान
भारत और रूस के ऐतिहासिक संबंध
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत और रूस के बीच के गहरे संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कई मौकों पर जब पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन मिला, तब भी रूस ने भारत का साथ दिया। दिल्ली में आयोजित म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में उन्होंने बताया कि भारत के लिए रूस के साथ संबंध केवल वर्तमान परिस्थितियों पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि इसके पीछे कई दशकों का इतिहास है।
जयशंकर ने कहा कि पिछले 70 वर्षों में रूस ने कई महत्वपूर्ण अवसरों पर भारत का समर्थन किया, जिसमें कश्मीर का मुद्दा भी शामिल है। उन्होंने बताया कि 1957 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कश्मीर से संबंधित एक प्रस्ताव को सोवियत संघ ने वीटो किया था। उस समय कई देशों ने उस प्रस्ताव का समर्थन किया था, लेकिन सोवियत वीटो के कारण वह आगे नहीं बढ़ सका।
विदेश मंत्री ने भारत-पाकिस्तान के युद्धों के दौरान विभिन्न देशों के रुख का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 1965 के युद्ध में चीन सहित कुछ देशों ने पाकिस्तान का समर्थन किया, जबकि 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान अमेरिका और चीन ने भी पाकिस्तान का पक्ष लिया। ऐसे समय में भारत और सोवियत संघ के बीच सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण था।
जयशंकर ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत की नीति को स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत विवाद का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से चाहता है। भारत ने दोनों देशों के साथ संपर्क बनाए रखा है और समुद्री सुरक्षा, अनाज और ऊर्जा आपूर्ति जैसे मुद्दों पर चर्चा की है। उन्होंने वैश्विक राजनीति में हो रहे बदलावों का भी जिक्र किया और भारत की सुरक्षा चिंताओं, विशेषकर पाकिस्तान से जुड़े आतंकवाद पर अपनी बात रखी।
उनके बयानों से यह स्पष्ट होता है कि भारत अपनी विदेश नीति में पुराने संबंधों के साथ-साथ वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को भी ध्यान में रख रहा है।
