मेनोपॉज: क्या पीरियड्स फिर से आ सकते हैं?
श्वेता क्वात्रा का अनुभव
अभिनेत्री श्वेता क्वात्रा, जो 'कहानी घर घर की', 'कुसुम' और 'बालवीर' जैसे लोकप्रिय टीवी शो में नजर आ चुकी हैं, ने हाल ही में एक इंटरव्यू में बताया कि उन्हें 40 साल की उम्र में मेनोपॉज का सामना करना पड़ा। उन्होंने इस समस्या का इलाज 5 वर्षों तक करवाया और बौद्ध मंत्रों का जाप किया। उनके अनुसार, इस प्रक्रिया के बाद उन्हें फिर से पीरियड्स आने लगे, जिसने कई लोगों को चौंका दिया।
क्या मेनोपॉज के बाद पीरियड्स आना संभव है?
यदि किसी महिला को लगातार 12 महीनों तक पीरियड्स नहीं आते हैं, तो उसे मेनोपॉज माना जाता है। इसके बाद, स्वाभाविक रूप से पीरियड्स का दोबारा आना आमतौर पर संभव नहीं होता। यदि मेनोपॉज के बाद कोई भी प्रकार की योनि से ब्लीडिंग होती है, तो इसे सामान्य नहीं समझना चाहिए। यह गर्भाशय की परत में बदलाव, पॉलीप, संक्रमण, हार्मोन थेरेपी के प्रभाव या कभी-कभी कैंसर जैसी गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है। ऐसे में तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना आवश्यक है।
क्या प्राकृतिक उपायों से मेनोपॉज को रिवर्स किया जा सकता है?
वर्तमान में उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों के अनुसार, मेनोपॉज को किसी भी प्राकृतिक उपाय, घरेलू नुस्खे, योग, मेडिटेशन या सप्लीमेंट्स से रिवर्स नहीं किया जा सकता। मेनोपॉज एक प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है जिसमें अंडाशय की कार्यक्षमता धीरे-धीरे समाप्त होती है। हालांकि, योग, मेडिटेशन, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से इसके लक्षणों जैसे हॉट फ्लैश, तनाव और नींद की समस्याओं को नियंत्रित किया जा सकता है।
मेनोपॉज की उम्र
मेनोपॉज महिलाओं के जीवन का एक स्वाभाविक चरण है, जब अंडाशय हार्मोन का उत्पादन कम कर देते हैं और मासिक धर्म स्थायी रूप से बंद हो जाता है। यह आमतौर पर 45 से 55 वर्ष की उम्र के बीच होता है, जबकि औसत आयु लगभग 50-51 वर्ष मानी जाती है। यदि 40 वर्ष से पहले मेनोपॉज होता है, तो इसे प्रीमेच्योर मेनोपॉज कहा जाता है और इसके लिए चिकित्सकीय जांच आवश्यक होती है।
मेनोपॉज के लक्षण
मेनोपॉज के दौरान महिलाओं में कई लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जैसे:
- मासिक धर्म का अनियमित होना और अंततः बंद हो जाना
- अचानक गर्मी लगना (हॉट फ्लैश) और रात में अत्यधिक पसीना आना
- नींद न आना या बार-बार नींद खुलना
- मूड में बदलाव, चिड़चिड़ापन या चिंता
- योनि में सूखापन और संभोग के दौरान असुविधा
- बार-बार पेशाब की समस्या या संक्रमण
- हड्डियों की कमजोरी (ऑस्टियोपोरोसिस) का खतरा बढ़ना
- त्वचा और बालों में बदलाव
महिलाओं के लिए स्वस्थ रहने के उपाय
मेनोपॉज के बाद महिलाओं को अपनी जीवनशैली पर ध्यान देना चाहिए। संतुलित आहार लें जिसमें कैल्शियम, विटामिन D, प्रोटीन, फल और हरी सब्जियां शामिल हों। नियमित रूप से वॉक, योग और स्ट्रेंथ एक्सरसाइज करें ताकि हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत रहें। पर्याप्त नींद लें, तनाव कम करने के लिए मेडिटेशन या प्राणायाम करें और धूम्रपान तथा अत्यधिक शराब से बचें। समय-समय पर बोन डेंसिटी, ब्लड प्रेशर, शुगर, लिपिड प्रोफाइल और स्त्री रोग संबंधी नियमित जांच करवाना भी महत्वपूर्ण है। यदि लक्षण बहुत अधिक परेशान कर रहे हों, तो डॉक्टर की सलाह से हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) या अन्य उपचार विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।
