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योग थेरेपी: व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुसार अपनाने की आवश्यकता

आयुष मंत्रालय ने योग थेरेपी के सही उपयोग के लिए जागरूकता बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण संदेश जारी किया है। मंत्रालय ने बताया है कि योग थेरेपी एक व्यक्ति-केंद्रित प्रक्रिया है, जिसमें अभ्यासों का चयन व्यक्ति की आवश्यकताओं और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार किया जाना चाहिए। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि योग थेरेपी सभी के लिए एक समान नहीं होती और इसके प्रभावी उपयोग के लिए योग्य चिकित्सक की देखरेख जरूरी है। जानें योग थेरेपी की सीमाएँ और इसके सही उपयोग के तरीके।
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योग थेरेपी का महत्व और सावधानियाँ

नई दिल्ली: आयुष मंत्रालय ने योग थेरेपी के प्रभावी उपयोग के लिए जागरूकता बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण संदेश जारी किया है। मंत्रालय ने बताया है कि योग थेरेपी एक व्यक्ति-केंद्रित प्रक्रिया है, जिसमें अभ्यासों का चयन व्यक्ति की आवश्यकताओं और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार किया जाना चाहिए।


मंत्रालय के अनुसार, योग थेरेपी में एक ही विधि सभी के लिए उपयुक्त नहीं होती। हर व्यक्ति की शारीरिक संरचना, लचीलापन और आंतरिक स्वास्थ्य में भिन्नता होती है। इसीलिए, हर किसी की शारीरिक, मानसिक और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताएँ अलग-अलग होती हैं, और इसलिए योग्य योग चिकित्सक की देखरेख में ही अभ्यास का चयन करना चाहिए। नियमित अभ्यास, जीवनशैली में उचित बदलाव और निरंतर निगरानी इसके प्रभावी होने के लिए आवश्यक हैं।


आयुष मंत्रालय ने योग थेरेपी की सीमाओं पर भी ध्यान दिया है। उच्च रक्तचाप, स्लिप डिस्क, हर्निया, हृदय रोग या हाल की सर्जरी वाले रोगियों के लिए सामान्य योग आसन भी जोखिम भरे हो सकते हैं। इसके अलावा, यह तत्काल राहत देने वाला उपचार नहीं है और चिकित्सा आपात स्थितियों के लिए उपयुक्त नहीं माना जा सकता।


एक महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि योग थेरेपी को चिकित्सा निदान या डॉक्टर द्वारा निर्धारित उपचार का विकल्प नहीं समझना चाहिए। योग थेरेपी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ पूरक रूप में कार्य कर सकती है, और इसका वास्तविक प्रभाव तभी सामने आता है जब अभ्यासकर्ता की विशिष्ट स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर उसके लिए अनुकूलित क्रियाएँ निर्धारित की जाएं।


मंत्रालय ने "जागरुकता के साथ योगाभ्यास" अभियान के तहत लोगों से जिम्मेदारी से योग करने की अपील की है। योग के सही दायरे को समझना ही जिम्मेदार योग अभ्यास का हिस्सा है। डिजिटल युग में इंटरनेट और सोशल मीडिया वीडियो देखकर कठिन अभ्यास करने की प्रवृत्ति बढ़ी है, जो अक्सर चोटों का कारण बनती है।


योग की अधूरी जानकारी और अविवेकपूर्ण अभ्यास लाभ के बजाय गंभीर नुकसान का कारण बन सकता है। इसलिए, आयुष मंत्रालय पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली के साथ सुरक्षित तरीके से जोड़ने पर जोर दे रहा है। नागरिकों से अनुरोध है कि वे योग को समझ-बूझकर अपनाएं और किसी भी स्वास्थ्य समस्या में डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता दें।