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वाराणसी पुलिसकर्मी का इस्तीफा: 24 घंटे ड्यूटी के दबाव से परेशान

वाराणसी के रामनगर थाने में तैनात एक पुलिसकर्मी ने 24 घंटे ड्यूटी के दबाव से परेशान होकर इस्तीफा दिया। उसने थाने के व्हाट्सऐप ग्रुप में अपना इस्तीफा भेजा, जिसमें उसने लगातार काम करने में असमर्थता जताई। इस मामले ने अधिकारियों को सक्रिय किया और सिपाही की काउंसिलिंग के बाद उसका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया। जानें इस घटना के पीछे की पूरी कहानी और पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव।
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सिपाही का इस्तीफा चर्चा का विषय


डिजिटल डेस्क। वाराणसी के रामनगर थाने में तैनात एक पुलिसकर्मी का इस्तीफा हाल ही में सुर्खियों में है। इस सिपाही ने थाने के आधिकारिक व्हाट्सऐप ग्रुप पर अपना इस्तीफा भेजते हुए 24 घंटे ड्यूटी करने में असमर्थता जताई। जैसे ही यह मामला अधिकारियों के पास पहुंचा, महकमे में हलचल मच गई और थाना प्रभारी के साथ सिपाही को तुरंत बुलाया गया।


सिपाही की परेशानियों का खुलासा

सूत्रों के अनुसार, सिपाही देवगन कुमार चौहान पिछले कुछ दिनों से ट्रॉमा सेंटर में भर्ती एक मरीज के साथ लगातार ड्यूटी कर रहा था। इसके अलावा, वह निजी और पारिवारिक समस्याओं से भी जूझ रहा था। इसी दौरान, काम के दबाव के चलते उसने 7 सितंबर की शाम को थाने के ग्रुप में कार्यमुक्त किए जाने का पत्र डाल दिया।


ड्यूटी के दबाव पर सवाल

सिपाही ने अपने पत्र में अधिकारियों से कहा कि वह हर दिन 24 घंटे काम करने की स्थिति में नहीं है और उसे सेवा से मुक्त किया जाए। पत्र सामने आते ही इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच गई। इसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए सिपाही और थाना प्रभारी से स्पष्टीकरण मांगा गया।


वाराणसी पुलिसकर्मी का इस्तीफा: 24 घंटे ड्यूटी के दबाव से परेशान


काउंसिलिंग के बाद बदला निर्णय

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, देवगन चौहान ने थाने के एक दीवान पर ड्यूटी लगाने में पक्षपात का आरोप भी लगाया। उनका कहना था कि कुछ पसंदीदा पुलिसकर्मियों को राहत दी जाती है, जबकि अन्य पर लगातार ड्यूटी का दबाव रहता है। पुलिस अधिकारियों ने सिपाही की स्थिति को समझने के बाद उससे बातचीत की। एसीपी विजय प्रताप सिंह के अनुसार, सिपाही ड्यूटी के बाद घर गया था और अगले दिन उसे फिर से मरीज के साथ जाने की जिम्मेदारी दी गई थी। घरेलू परिस्थितियों के कारण वह तनाव में था।


अधिकारियों ने सिपाही की काउंसिलिंग कराई। बातचीत के दौरान उसने स्पष्ट किया कि वह नौकरी छोड़ना नहीं चाहता और अपनी सेवा जारी रखना चाहता है। इसके बाद उसका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया। हालांकि, सिपाही ने थाने के ग्रुप से पत्र डिलीट कर दिया, लेकिन तब तक उसका स्क्रीनशॉट और वीडियो सोशल मीडिया पर फैल चुका था। यह घटना एक बार फिर पुलिसकर्मियों पर काम के दबाव और उनकी मानसिक स्थिति को लेकर चर्चा का विषय बन गई है।