शरद पूर्णिमा पर बनाएं स्वादिष्ट खीर: जानें आसान रेसिपी और टिप्स
खीर बनाने की परंपरा और महत्व
नई दिल्ली: शरद पूर्णिमा की रात खीर बनाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणों से अमृत बरसता है, इसलिए लोग खीर को खुले आसमान के नीचे रखकर अगले दिन प्रसाद के रूप में खाते हैं। इस बार शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर को मनाई जाएगी। अगर आप भी इस मौके पर घर पर खीर बनाने की तैयारी कर रही हैं, तो कुछ आसान टिप्स अपनाकर इसे बाजार जैसी गाढ़ी, मलाईदार और स्वादिष्ट बना सकती हैं। इसके लिए आपको मावा या कंडेंस्ड मिल्क की भी जरूरत नहीं पड़ेगी।
खीर बनाने के लिए आवश्यक सामग्री
खीर बनाने के लिए जरूरी सामग्री
खीर बनाने के लिए 1 लीटर फुल क्रीम दूध, 1/4 कप छोटे दाने वाले चावल, आधा कप चीनी या स्वादानुसार, 8-10 केसर के धागे, 2 चम्मच गर्म दूध, आधा छोटा चम्मच हरी इलायची पाउडर और 1 बड़ा चम्मच देसी घी लें। इसके अलावा, स्वाद और सजावट के लिए बारीक कटे काजू, बादाम, पिस्ता और चिरौंजी भी इस्तेमाल करें।
खीर बनाने की विधि
इस तरह करें खीर बनाने की शुरुआत
सबसे पहले चावल को अच्छी तरह धोकर 20 मिनट के लिए पानी में भिगो दें। इसके बाद पानी निकालकर चावल को हाथों से हल्का दरदरा कर लें। अब कड़ाही में थोड़ा देसी घी गर्म करें और चावल को करीब एक मिनट तक भून लें। इससे खीर में अच्छी खुशबू आएगी और चावल तले में चिपकने की आशंका भी कम होगी। अब भारी तले वाले बर्तन में थोड़ा पानी छिड़ककर दूध डालें और तेज आंच पर उबाल आने दें। दूध उबलने लगे तो इसमें भुने हुए चावल डाल दें। आंच धीमी करके खीर को पकने दें। बीच-बीच में चलाते रहें, ताकि दूध नीचे न लगे। चावल गलने और दूध गाढ़ा होने तक इसे पकाएं।
खीर को रबड़ी जैसा बनाने का तरीका
रबड़ी जैसी मलाईदार खीर बनाने का खास तरीका
खीर को गाढ़ा बनाने के लिए बर्तन के किनारों पर जमी मलाई को खुरचकर दूध में मिलाते रहें। इसके अलावा, थोड़े से पके चावल और दूध को कलछी से हल्का मैश कर दें। इससे खीर को प्राकृतिक गाढ़ापन मिलेगा और उसका स्वाद भी बढ़ जाएगा। जब चावल अच्छी तरह पक जाएं और खीर मनचाही गाढ़ी हो जाए, तब इसमें चीनी, गर्म दूध में भिगोया हुआ केसर, इलायची पाउडर और कटे हुए मेवे डालें।
चीनी हमेशा चावल पकने के बाद ही डालें, ताकि चावल अच्छी तरह गल सकें। अब खीर को धीमी आंच पर 3-4 मिनट और पकाकर गैस बंद कर दें। तैयार खीर को साफ बर्तन में निकालें और ढककर परंपरा के अनुसार रात में चांदनी के नीचे रखें। सुबह इसे प्रसाद के रूप में परोसें।
