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शारदीय नवरात्र 2023: जानें कब से शुरू होंगे पर्व और क्या है विशेष महत्व

इस वर्ष शारदीय नवरात्र का आरंभ 11 अक्टूबर से होगा और यह 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ समाप्त होगा। इस दौरान मां दुर्गा की पूजा, व्रत और धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया जाएगा। भक्त विभिन्न स्वरूपों की पूजा करते हैं और कलश स्थापना का शुभ समय भी बताया गया है। जानें नवरात्र की महत्वपूर्ण तिथियाँ, पूजा विधि और मां दुर्गा के आगमन का विशेष महत्व।
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नवरात्र का शुभारंभ और समापन


नई दिल्ली: पंचांग के अनुसार, इस वर्ष शारदीय नवरात्र का आरंभ 11 अक्टूबर को होगा और यह 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ समाप्त होगा। इस दौरान देशभर में मां दुर्गा की पूजा, व्रत, पाठ और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे। भक्त इस नौ दिवसीय पर्व में मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा करते हैं। नवरात्र की शुरुआत कलश स्थापना से होती है, इसके बाद अष्टमी, नवमी और दशहरा जैसे महत्वपूर्ण पर्व आते हैं।


नवरात्र का पहला दिन और कलश स्थापना

11 अक्टूबर से होगी नवरात्र की शुरुआत


शारदीय नवरात्र का पहला दिन आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि होगा। इसी दिन घरों और मंदिरों में विधिपूर्वक कलश स्थापना की जाएगी। पहले दिन मां दुर्गा के स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। कलश स्थापना के साथ भक्त नौ दिनों तक देवी की आराधना का संकल्प लेते हैं। कई भक्त पूरे नौ दिन व्रत रखते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा-पाठ करते हैं।


कलश स्थापना का शुभ समय

कलश स्थापना का शुभ समय क्या है?


11 अक्टूबर को कलश स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त को शुभ माना गया है। इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:36 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक रहेगा। पूजा के समय में शहर के अनुसार भिन्नता हो सकती है। सूर्योदय और स्थानीय समय में बदलाव के कारण अलग-अलग शहरों में समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है। इसलिए कलश स्थापना से पहले अपने शहर के पंचांग से समय की पुष्टि करना आवश्यक है।


नवरात्र में दुर्गा सप्तशती का पाठ

नवरात्र में क्यों किया जाता है दुर्गा सप्तशती का पाठ?


शारदीय नवरात्र केवल व्रत और पूजा तक सीमित नहीं है। धार्मिक परंपरा में इन दिनों को देवी साधना और आध्यात्मिक अनुशासन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। भक्त नवरात्र के दौरान दुर्गा सप्तशती, देवी कवच और सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करते हैं। मान्यता है कि मां दुर्गा की आराधना और मंत्र जाप से मन को शांति मिलती है और घर में सकारात्मकता बनी रहती है। कुछ भक्त पुरोहित से संकल्प लेकर दुर्गा सप्तशती का पाठ भी करवाते हैं।


नवरात्र की महत्वपूर्ण तिथियाँ

अब हम जानेंगे नवरात्र के खास तारीखों के बारे में


बेलवरण पूजा


11 अक्टूबर को कलश स्थापना के बाद 16 अक्टूबर को बेलवरण पूजा होगी। नवरात्र के दौरान दुर्गा पूजा से जुड़ी कई विशेष परंपराएं निभाई जाती हैं। 16 अक्टूबर को बेलवरण पूजा का आयोजन होगा, जो बंगाल और पूर्वी भारत की दुर्गा पूजा परंपरा में विशेष महत्व रखती है।


महासप्तमी


17 अक्टूबर को महासप्तमी की पूजा होगी। पंचांग के अनुसार, सुबह 8:58 बजे के बाद सप्तमी से संबंधित पूजा की जाएगी। इस दिन नौपत्रिका प्रवेश, निशा पूजा और देवी स्थापना जैसी परंपराएं निभाई जाएंगी।


दुर्गा अष्टमी


18 अक्टूबर को दुर्गा अष्टमी मनाई जाएगी। इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। अष्टमी के दिन व्रत, विशेष पूजा और कन्या पूजन का विशेष महत्व है।


संधि पूजा और महानवमी


19 अक्टूबर को संधि पूजा और महानवमी का पर्व होगा। अष्टमी और नवमी तिथि के संधिकाल में संधि पूजा करने की परंपरा है।


विजयादशमी और विसर्जन


20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी। इस दिन नवमी तिथि सुबह 9:35 बजे तक रहेगी और नवरात्र व्रत का पारण किया जाएगा। इसी दिन मां दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन की परंपरा भी निभाई जाएगी।


मां दुर्गा का आगमन

इस बार हाथी पर होगा मां दुर्गा का आगमन


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस साल मां दुर्गा का आगमन हाथी पर होगा। हाथी को समृद्धि और ऐश्वर्य का प्रतीक माना जाता है। देवी का हाथी पर आगमन अच्छी वर्षा और कृषि में उन्नति का संकेत माना जाता है।


श्रद्धा और संयम के साथ पूजा

श्रद्धा और संयम के साथ करें देवी की पूजा


शारदीय नवरात्र मां दुर्गा की आराधना के साथ-साथ आत्मचिंतन और आध्यात्मिक साधना का भी अवसर है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत, मंत्र जाप, पाठ और सेवा जैसे धार्मिक कार्य करते हैं। पूजा को दिखावे के बजाय श्रद्धा और सकारात्मक भावना के साथ करना चाहिए।