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सेलेना गोमेज़ ने वेपिंग के दुष्प्रभावों का किया खुलासा

सेलेना गोमेज़ ने हाल ही में एक वीडियो में अपनी आवाज में बदलाव के पीछे की वजह निकोटिन वेपिंग को बताया। उन्होंने वेपिंग के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में चेतावनी दी। जानें वेपिंग क्या है, इसके नुकसान और इसे छोड़ने के उपाय। यह जानकारी आपको वेपिंग के खतरों के प्रति जागरूक करेगी।
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सेलेना गोमेज़ का वीडियो संदेश

हाल ही में, प्रसिद्ध हॉलीवुड गायिका सेलेना गोमेज़ ने एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने बताया कि उनकी आवाज में बदलाव आया है। इसके पीछे की वजह निकोटिन वेपिंग की लत बताई गई है। यह पहली बार है जब सेलेना ने वेपिंग का उल्लेख किया है।


वेपिंग क्या है?

वेपिंग एक प्रकार की ई-सिगरेट है, जो बैटरी से चलने वाले उपकरण के माध्यम से निकोटिन, फ्लेवर वाले लिक्विड और अन्य रसायनों को गर्म करके भाप उत्पन्न करती है। लोग इसे सांस के जरिए लेते हैं। हालांकि, यह धारणा गलत है कि वेपिंग सिगरेट से कम हानिकारक है। वास्तव में, यह स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है और इसके दीर्घकालिक उपयोग से हृदय, मस्तिष्क और फेफड़ों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।


वेपिंग से आवाज पर प्रभाव

वेपिंग से निकलने वाले धुएं में निकोटिन और हानिकारक रसायन होते हैं, जो गले और वोकल कॉर्ड को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे गले में सूखापन, जलन और आवाज की गुणवत्ता में कमी आ सकती है। Journal Of Voice में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, ई-सिगरेट का उपयोग आवाज की ऊपरी परत में सूजन पैदा कर सकता है।


भारत में वेपिंग का उपयोग

Global State of Tobacco Harm Reduction की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में केवल 0.2% लोग वेपिंग का उपयोग करते हैं, विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया भर में 1.5 करोड़ बच्चे वेपिंग की लत से प्रभावित हैं। भारत में ई-सिगरेट की बिक्री पर प्रतिबंध है, और 2019 में सरकार ने ई-सिगरेट प्रतिषेध अधिनियम लागू किया था।


वेपिंग के दुष्प्रभाव

वेपिंग से फेफड़ों में सूजन, उच्च रक्तचाप, सांस संबंधी समस्याएं, मस्तिष्क की कार्यक्षमता में कमी, हृदय रोग का खतरा, कैंसर और कमजोर इम्यूनिटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।


वेपिंग की लत छोड़ने के उपाय

  • ध्यान और योग का अभ्यास करें।
  • तलब लगने पर पानी पिएं।
  • नियमित व्यायाम करें।
  • स्वस्थ आहार का सेवन करें।
  • निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरेपी का सहारा लें।