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स्ट्रोक के संकेत: लक्षणों को नजरअंदाज करना हो सकता है खतरनाक

आजकल की तेज़ रफ्तार जिंदगी में लोग अक्सर सिरदर्द और कमजोरी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन ये लक्षण संभावित स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं। जानें कि कैसे पहचानें और समय पर उपचार क्यों आवश्यक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हृदय संबंधी बीमारियाँ मृत्यु का प्रमुख कारण हैं। इस लेख में हम स्ट्रोक के लक्षणों, उनके कारणों और बचाव के उपायों पर चर्चा करेंगे।
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स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानें

नई दिल्ली: आजकल की तेज़ रफ्तार जिंदगी में लोग अक्सर सिरदर्द, चक्कर आना, और हाथ-पैरों में कमजोरी जैसी समस्याओं को थकान समझकर अनदेखा कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये लक्षण संभावित स्ट्रोक, जिसे ब्रेन अटैक भी कहा जाता है, के संकेत हो सकते हैं? स्ट्रोक एक गंभीर चिकित्सा आपात स्थिति है, जिसमें समय पर उपचार न मिलने पर व्यक्ति की जान भी जा सकती है। इसलिए, इन संकेतों को समझना और लापरवाही से बचना आवश्यक है।


विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, हृदय संबंधी बीमारियाँ वैश्विक स्तर पर मृत्यु का प्रमुख कारण हैं। 2022 में लगभग 1.98 करोड़ लोगों की मौत हृदय रोगों के कारण हुई, जिनमें से 85 प्रतिशत मौतें हार्ट अटैक और स्ट्रोक के कारण हुईं। स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त की आपूर्ति रुक जाती है या रक्त वाहिका फट जाती है, जिससे मस्तिष्क की कोशिकाओं को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और वे क्षतिग्रस्त होने लगती हैं।


स्ट्रोक का सबसे सामान्य लक्षण चेहरे, हाथ या पैर में अचानक कमजोरी आना है। विशेष रूप से शरीर के एक तरफ कमजोरी महसूस होना एक गंभीर संकेत हो सकता है। कभी-कभी व्यक्ति का चेहरा एक तरफ झुकने लगता है या मुस्कुराने पर चेहरे के दोनों हिस्से समान रूप से काम नहीं करते। इसके अलावा, अचानक बोलने में कठिनाई, जुबान लड़खड़ाना, या सामने वाले की बात समझने में परेशानी भी स्ट्रोक के लक्षण हो सकते हैं। यदि किसी को अचानक एक या दोनों आंखों से धुंधला दिखाई देने लगे, चलने में कठिनाई हो या संतुलन बिगड़ जाए, तो इसे सामान्य चक्कर या कमजोरी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।


कुछ मामलों में, बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक तेज सिरदर्द भी स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। इसके साथ उल्टी, बेहोशी, या शरीर के किसी हिस्से में सुन्नपन महसूस हो सकता है। कभी-कभी ये लक्षण कुछ मिनटों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि खतरा टल गया है। यह मिनी स्ट्रोक, जिसे ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (टीआईए) कहा जाता है, का संकेत हो सकता है, जो भविष्य में बड़े स्ट्रोक की चेतावनी देता है।


स्ट्रोक का खतरा कई कारणों से बढ़ सकता है, जैसे अस्वस्थ खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी, तंबाकू का सेवन, अत्यधिक शराब पीना, और मोटापा। इसके अलावा, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल भी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए, नियमित स्वास्थ्य जांच कराना और जीवनशैली में सुधार करना अत्यंत आवश्यक है।


डब्ल्यूएचओ का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति में अचानक स्ट्रोक के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत उसे अस्पताल की इमरजेंसी में ले जाना चाहिए या एंबुलेंस बुलानी चाहिए। लक्षणों की शुरुआत का समय नोट करना भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह जानकारी उपचार के दौरान सहायक होती है। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा न दें।