स्तनपान सप्ताह: सही पोजीशन के महत्व पर ध्यान दें
स्तनपान सप्ताह का महत्व
नई दिल्ली: हर साल अगस्त के पहले सप्ताह में विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य स्तनपान के महत्व के प्रति जागरूकता फैलाना और माताओं को सही जानकारी प्रदान करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल स्तनपान कराना ही नहीं, बल्कि बच्चे को सही पोजीशन में दूध पिलाना भी अत्यंत आवश्यक है। इससे मां और बच्चे दोनों को कई लाभ मिलते हैं।
सही पोजीशन के फायदे
स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि सही ब्रेस्टफीडिंग पोजीशन अपनाने से बच्चे को पर्याप्त दूध मिलता है और मां को कमर, गर्दन और कंधों में दर्द की समस्या कम होती है। इसके अलावा, बच्चे को सही तरीके से स्तन पकड़ने में भी आसानी होती है, जिससे निप्पल में दर्द या घाव होने की संभावना कम हो जाती है।
स्तनपान की विभिन्न पोजीशन
स्तनपान के लिए कई प्रकार की पोजीशन अपनाई जा सकती हैं। क्रैडल होल्ड सबसे सामान्य तरीका है, जिसमें बच्चा मां की बांह पर आराम से लेटा रहता है और उसका सिर मां की कोहनी के पास होता है। क्रॉस-क्रैडल होल्ड में मां दूसरी बांह से बच्चे के सिर और गर्दन को सहारा देती है, जो नवजात शिशुओं के लिए विशेष रूप से सहायक है।
इसके अलावा, लेड-बैक पोजीशन भी लोकप्रिय है। इसमें मां हल्का पीछे की ओर झुककर बैठती है और बच्चा उसके सीने पर लेटकर खुद ही स्तन पकड़ने की कोशिश करता है, जो बच्चे की प्राकृतिक प्रवृत्ति को बढ़ावा देता है।
यदि मां को आराम की आवश्यकता हो, खासकर रात के समय या सिजेरियन डिलीवरी के बाद, तो साइड-लाइंग पोजीशन एक बेहतर विकल्प हो सकती है। इसमें मां और बच्चा एक-दूसरे की ओर करवट लेकर लेटते हैं और आराम से स्तनपान कराया जा सकता है। वहीं, रिक्लाइनिंग पोजीशन में मां आधी लेटी हुई अवस्था में रहती है और बच्चा उसके सीने से सटा होता है।
व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार पोजीशन
विशेषज्ञों का कहना है कि हर मां और बच्चे की जरूरतें अलग होती हैं। इसलिए कोई एक पोजीशन सभी के लिए उपयुक्त नहीं होती। जो तरीका मां और बच्चे दोनों के लिए सबसे आरामदायक हो, वही अपनाना चाहिए।
यदि स्तनपान कराने में किसी प्रकार की समस्या हो, जैसे बच्चे का सही तरीके से दूध न पीना, दर्द होना या दूध कम आना, तो बिना संकोच अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र, डॉक्टर या स्तनपान सलाहकार से सलाह लें।
