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हार्ट ब्लॉकेज की पहचान: जानें कैसे करें जांच

आज के समय में हार्ट संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है। जानें कि कैसे आप अपने रक्तचाप की माप करके हार्ट में ब्लॉकेज की पहचान कर सकते हैं। डॉक्टर साकेत गोयल के अनुसार, पैर में ब्लड प्रेशर मशीन का उपयोग करके आप ब्लॉकेज का पता लगा सकते हैं। इसके अलावा, कुछ लक्षणों की अनदेखी न करने और हृदय स्वास्थ्य का ध्यान रखने के उपाय भी जानें।
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हार्ट स्वास्थ्य की जानकारी

आजकल, हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है, इसलिए यह आवश्यक है कि हर व्यक्ति अपने रक्तचाप (बीपी) के स्तर को जानता हो। American Heart Association के अनुसार, यदि किसी का ब्लड प्रेशर 120/80 mmHg है, तो इसे सामान्य माना जाता है।


पैर में ब्लड प्रेशर मशीन का उपयोग

आप बीपी की मशीन का उपयोग करके अपने रक्तचाप की माप कर सकते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यदि आप इसे अपने पैर पर लगाते हैं, तो यह हृदय में ब्लॉकेज का संकेत दे सकता है? इस विषय पर जानकारी देते हुए, कोटा हार्ट इंस्टीट्यूट के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर साकेत गोयल ने बताया।


ब्लॉकेज की पहचान कैसे करें?

डॉक्टर साकेत गोयल के अनुसार, सबसे पहले आपको अपने हाथ पर बीपी मशीन लगाकर रीडिंग लेनी होगी। फिर, उसी मशीन को अपने पैर के एंकल पर बांधें और रीडिंग नोट करें। दोनों रीडिंग को आपस में भाग दें। यदि रीडिंग 1 से 1.3 के बीच है, तो यह सामान्य है। लेकिन यदि यह 0.9 से कम है, तो ब्लॉकेज की संभावना हो सकती है। पैर का रक्तचाप यदि हाथ के रक्तचाप से कम है, तो यह हार्ट में ब्लॉकेज का संकेत हो सकता है। इसे ABI (Ankle-Brachial Index) स्कोर कहा जाता है। हालांकि, केवल इस टेस्ट से ब्लॉकेज की पुष्टि नहीं होती। इसके लिए ईसीजी, इकोकार्डियोग्राफी, रक्त परीक्षण, स्ट्रेस टेस्ट, सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी और पारंपरिक कोरोनरी एंजियोग्राफी जैसे अन्य परीक्षणों की आवश्यकता होती है।


लक्षणों की अनदेखी न करें

  • सीने में दर्द
  • सांस लेने में कठिनाई
  • बिना कारण अधिक पसीना आना
  • चक्कर आना
  • बांह, कंधे, पीठ, गर्दन के दर्द का जबड़े तक फैलना
यदि ये लक्षण बार-बार दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। लक्षणों के ठीक होने का इंतजार न करें।


हृदय का ध्यान कैसे रखें?

  • जंक फूड से परहेज करें।
  • वजन को नियंत्रित रखें।
  • संतुलित आहार का सेवन करें।
  • धूम्रपान और तंबाकू का सेवन बंद करें।
  • समय-समय पर स्वास्थ्य की जांच कराते रहें।