हिमाचल प्रदेश का युल्ला कांडा कृष्ण मंदिर: अनोखी परंपरा और अद्भुत दृश्य
युल्ला कांडा कृष्ण मंदिर की विशेषताएँ
युल्ला कांडा कृष्ण मंदिर: हिमालय की ऊँचाइयों में स्थित इस मंदिर की एक अनोखी परंपरा आज भी जीवित है। हर साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर यहाँ किन्नौरी टोपी की विशेष रस्म निभाई जाती है। इसे विश्व का सबसे ऊँचा श्रीकृष्ण मंदिर माना जाता है।
प्राचीन मंदिर की जानकारी
युल्ला कांडा कृष्ण मंदिर हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले की रोरा घाटी में स्थित है। यह समुद्र तल से लगभग 12,778 फीट (3,895 मीटर) की ऊँचाई पर एक शांत अल्पाइन झील के बीच बना हुआ है।
‘तैरती टोपी’ की परंपरा
स्थानीय मान्यता के अनुसार, पांडवों ने अपने वनवास के दौरान इस क्षेत्र में समय बिताया था। इस मंदिर से जुड़ी सबसे दिलचस्प परंपरा ‘तैरती टोपी’ की रस्म है, जो हर साल अगस्त-सितंबर में जन्माष्टमी के त्योहार पर मनाई जाती है।
स्थानीय आस्था
युल्ला कांडा को कुछ लोग स्वर्ग का द्वार मानते हैं। यहाँ जन्माष्टमी का उत्सव बहुत प्रसिद्ध है। इस दिन किन्नौरी टोपी को उल्टा करके झील में डाला जाता है। मान्यता है कि यदि टोपी बिना डूबे झील के पार पहुँच जाती है, तो यह शुभ संकेत माना जाता है। वहीं, टोपी का डूबना अशुभ माना जाता है। यह एक स्थानीय आस्था है, जिसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
कैसे पहुँचें
इस ट्रेक का मुख्य आधार गाँव युल्ला खास है।
सड़क मार्ग: आप शिमला से राष्ट्रीय राजमार्ग-5 (NH-5) पकड़कर रामपुर और तापरी होते हुए युल्ला खास गाँव तक पहुँच सकते हैं (दूरी लगभग 230-240 किमी)।
ट्रेक की शुरुआत: युल्ला खास गाँव में गाड़ियों का रास्ता समाप्त होता है और यहीं से पैदल ट्रेक शुरू होता है।
