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NEET UG में सफलता: सीमित संसाधनों के बावजूद ई. निवेथा की प्रेरणादायक कहानी

ई. निवेथा, एक आदिवासी गांव की छात्रा, ने सीमित संसाधनों के बावजूद NEET UG परीक्षा में सफलता प्राप्त की है। मजदूर पिता और गृहिणी मां की संतान, निवेथा ने पहले प्रयास में ही 245 अंक हासिल किए और अपने क्षेत्र की पहली छात्रा बनीं। उनकी कहानी यह दर्शाती है कि दृढ़ संकल्प और सही मार्गदर्शन से किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है। जानें कैसे उन्होंने इंटरनेट की कमी और अन्य चुनौतियों का सामना किया और एक NGO की मदद से अपने सपने को साकार किया।
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NEET UG में सफलता की कहानी


NEET UG में सफलता की कहानी: सपनों को साकार करने के लिए महंगे संसाधनों या बड़े शहरों की आवश्यकता नहीं होती। तमिलनाडु के एक दूरदराज आदिवासी पहाड़ी गांव की निवासी ई. निवेथा ने सीमित साधनों के बावजूद NEET-UG परीक्षा में सफलता प्राप्त कर यह सिद्ध कर दिया कि दृढ़ संकल्प के आगे सभी बाधाएं छोटी होती हैं। मजदूर पिता और गृहिणी मां की संतान निवेथा ने पहले प्रयास में ही मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल की। वह अपने क्षेत्र के 18 आदिवासी पहाड़ी गांवों की पहली छात्रा बन गई हैं, जिन्होंने NEET पास कर डॉक्टर बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।


18 गांवों के लिए बनीं प्रेरणा

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, ई. निवेथा तमिलनाडु के येरकाउड हिल्स के गुंडूर गांव की निवासी हैं। उन्होंने पहले प्रयास में NEET-UG में 720 में से 245 अंक प्राप्त किए। इसके साथ ही, वह अपने क्षेत्र के 18 आदिवासी पहाड़ी गांवों की पहली छात्रा बन गईं, जिसने इस राष्ट्रीय स्तर की मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता प्राप्त की।


इंटरनेट की कमी ने बढ़ाई चुनौतियां

निवेथा की शिक्षा का सफर आसान नहीं रहा। उनके गांव में लंबे समय तक स्थिर इंटरनेट सेवा उपलब्ध नहीं थी। ऑनलाइन कक्षाओं और अध्ययन सामग्री डाउनलोड करने के लिए उन्हें कई बार गांव से बाहर जाना पड़ता था। परिवहन की सुविधाएं भी सीमित थीं और नियमित बस सेवा हाल ही में शुरू हुई है। इन सभी चुनौतियों के बावजूद, उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी।


NGO का सहयोग

कक्षा 12 पूरी करने के बाद, 2025 में पहाड़ी क्षेत्रों में कार्यरत एक स्थानीय NGO ने निवेथा को NEET की तैयारी के लिए मार्गदर्शन और कोचिंग प्रदान की। वह रोजाना येरकाउड और सेलम के बीच यात्रा कर पढ़ाई करती थीं। निवेथा का कहना है कि सरकारी स्कूलों की शिक्षा और NGO से मिले सहयोग ने उनकी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


डॉक्टर बनने का सफर सरकारी स्कूल से शुरू

निवेथा ने कक्षा 10 तक सरकारी स्कूल में पढ़ाई की और बाद में सरकारी सहायता प्राप्त नाजरेथ गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल से 12वीं की परीक्षा 496 अंकों के साथ उत्तीर्ण की। अब उन्होंने MBBS और BDS पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आवेदन किया है। उनका सपना डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना है।


तमिलनाडु में NEET-UG पास करने वाले छात्रों की संख्या में कमी

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष तमिलनाडु में NEET-UG पास करने वाले छात्रों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 15,000 कम रही। 2025 में 76,181 उम्मीदवार सफल हुए थे, जबकि 2026 में यह संख्या 61,306 रही। राज्य में पंजीकरण बढ़ने के बावजूद परीक्षा में शामिल होने और सफल होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या में गिरावट देखी गई है।