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अंसीरा अंची: संघर्ष से सफलता की ओर एक प्रेरणादायक यात्रा

अंसीरा अंची की कहानी एक प्रेरणादायक यात्रा है, जिसमें उन्होंने कठिनाइयों का सामना करते हुए अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए संघर्ष किया। विवाह के बाद शिक्षा में बाधाओं का सामना करते हुए, उन्होंने अपने सपनों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत की। अंसीरा ने 5 लाख उम्मीदवारों के बीच परीक्षा देकर पुलिस अधिकारी बनने का सपना पूरा किया। उनकी यह यात्रा न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह साबित करती है कि कठिनाइयों के बावजूद सफलता संभव है।
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संघर्ष की कहानी

नई दिल्ली: केरल की अंसीरा अंची की यात्रा उन कठिनाइयों की दास्तान है, जो बार-बार इंसान की हिम्मत को परखती हैं। 18 साल की उम्र में विवाह के बाद उनकी शिक्षा रुक गई और जीवन में कई तरह की पाबंदियां आ गईं। जिस शिक्षा को वह अपने विकास का माध्यम मानती थीं, वही उनके लिए संघर्ष का कारण बन गई। उनके फोन को तोड़ा गया, किताबें जलाई गईं, और घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा। फिर भी, बच्चों के उज्जवल भविष्य की उम्मीद ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।


शादी के बाद शिक्षा में बाधाएं

अंसीरा ने एक इंटरव्यू में अपने संघर्ष और सफलता की कहानी साझा की, जिसे उन्होंने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम पर भी बताया। उन्होंने कहा कि 2011 में, जब वह 18 वर्ष की थीं, तब सरकारी कॉलेज में दाखिला लिया था। इसी दौरान विवाह का प्रस्ताव आया और उनकी जिंदगी का रास्ता बदल गया। ससुराल में समय के साथ परिस्थितियां और भी कठिन होती गईं। पढ़ाई की बात करने पर उनके साथ हिंसा होने लगी। उन्होंने बताया कि उनकी किताबें जला दी गईं और बच्चों के साथ भी मारपीट हुई। कई बार उन्हें भोजन के लिए भी परेशान किया गया। नौकरी मिलने के बाद भी घर से बाहर न निकल पाने की धमकी दी जाती थी। अंततः हिंसा बढ़ने पर वह बच्चों के साथ अपने माता-पिता के पास लौट आईं और अपनी जिंदगी को फिर से संवारने का निर्णय लिया।


बच्चों के भविष्य के लिए संघर्ष

अंसीरा के दो बच्चे थे और उनकी जरूरतों की जिम्मेदारी उनके लिए एक बड़ी चिंता थी। उन्होंने महसूस किया कि बच्चों को बेहतर जीवन देने के लिए उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत होना होगा। इसी दौरान उनके एक रिश्तेदार ने PSC की तैयारी शुरू की थी, जिससे उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरणा मिली और उन्होंने कोचिंग में जाना शुरू किया। एक पुराने शिक्षक ने भी उन्हें हिम्मत दी और आर्थिक चिंताओं से ऊपर उठकर अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा।


सपनों की ओर बढ़ते कदम

करीब 25 वर्ष की उम्र में, अंसीरा छोटे बच्चे और शिशु को संभालते हुए कोचिंग जाती थीं। दिन की जिम्मेदारियों के बाद रात उनकी पढ़ाई के लिए समर्पित रहती थी। उन्होंने बताया कि बच्चों के सोने के बाद वह आधी रात तक चुपचाप किताबें पढ़ती थीं। कई बार पढ़ाई के लिए सोने का बहाना बनाना पड़ता था। कठिन परिस्थितियों में भी वह हर परीक्षा की तैयारी करती रहीं।


परीक्षा में सफलता

अंसीरा ने बताया कि उन्होंने लगभग 5 लाख उम्मीदवारों के बीच परीक्षा दी। उस समय वह 12वीं पास थीं, जबकि उनके आस-पास MBA और इंजीनियरिंग जैसी डिग्री वाले उम्मीदवार भी थे। तीन बार मां बनने के बाद शारीरिक परीक्षा पास करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन उन्होंने इसे भी पार किया। परीक्षा और ट्रेनिंग पूरी करने के बाद वह पुलिस अधिकारी बनीं।