कृतिका की प्रेरणादायक यात्रा: एक आईआरएस अधिकारी बनने की कहानी
कृतिका की प्रेरणादायक यात्रा:
कई बार जीवन में ऐसे अनुभव होते हैं जो व्यक्ति को तोड़ देते हैं, लेकिन कभी-कभी वही अनुभव आगे बढ़ने का कारण बन जाते हैं। कृतिका की कहानी भी इसी तरह की है। अपने बचपन में पिता की बेरुखी और मां को समाज के तानों का सामना करते हुए, उन्होंने कई कठिनाइयों का सामना किया। हार मानने के बजाय, उन्होंने अपनी मेहनत को अपनी ताकत बनाया और सिविल सेवा में जाने का सपना पूरा करने का संकल्प लिया।
चौथी कक्षा में 99 प्रतिशत अंक
कर्नाटक के हासन में पली-बढ़ी कृतिका ने कई बार असफलता का सामना किया। चौथी कक्षा में गणित में 99 अंक प्राप्त करने के बाद, उन्हें पहली बार यह एहसास हुआ कि अच्छे प्रदर्शन से लोग उनके प्रति अपना दृष्टिकोण बदल सकते हैं। यह अनुभव उनके लिए आगे बढ़ने की प्रेरणा बना। हालांकि, यूपीएससी की तैयारी के दौरान चार बार असफल होने के बाद, उन्हें अपनी सोच पर पुनर्विचार करना पड़ा।
पिता की बेरुखी और मां के ताने
कृतिका ने जोश टॉक्स को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि उनके जन्म के समय से ही उनके पिता खुश नहीं थे क्योंकि वह एक बेटी थीं। बचपन में, उन्होंने अपने पिता को खुश करने के लिए अच्छे अंक और मेडल हासिल करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें सराहना नहीं मिली। बाद में, उनके माता-पिता का तलाक हो गया, जिसके बाद कृतिका और उनकी मां को सामाजिक भेदभाव और रिश्तेदारों के तानों का सामना करना पड़ा।
चौथी कक्षा के 99 नंबरों ने बदला नजरिया
माता-पिता के अलग होने के बाद, कृतिका ने देखा कि स्कूल में कुछ बच्चे उनसे दूर होने लगे थे। लेकिन चौथी कक्षा में गणित में 99 अंक आने के बाद, उनका अनुभव बदल गया। जो बच्चे पहले उनसे दूर रहते थे, वे अब उनके पास आने लगे। इस घटना ने उनके मन पर गहरा प्रभाव डाला और उन्हें लगा कि पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करके वह अपनी पहचान बना सकती हैं।
मां के सम्मान के लिए चुना सिविल सेवा का रास्ता
कृतिका ने ठान लिया कि वह अपनी मां को गर्व महसूस कराएंगी और साबित करेंगी कि एक अकेली मां भी अपनी बेटी को बड़ी सफलता तक पहुंचा सकती है। इसी सोच के साथ, उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की। उनकी तैयारी की सराहना कोचिंग संस्थान के निदेशक और मॉक इंटरव्यू पैनल के सदस्यों ने भी की। फिर भी, वह चार बार अंतिम चयन सूची में जगह नहीं बना सकीं।
अंधेरे कमरे में मिला रोसेंथल इफेक्ट का विचार
लगातार असफलताओं से कृतिका भीतर से टूटने लगी थीं। एक रात परिणाम का इंतजार करते हुए, वह अंधेरे कमरे में बैठकर रो रही थीं। तभी उनकी नजर लैपटॉप की स्क्रीन पर रोसेंथल इफेक्ट पर पड़ी, जिसे पिग्मेलियन इफेक्ट भी कहा जाता है। यह मनोवैज्ञानिक अवधारणा बताती है कि किसी व्यक्ति से जुड़ी उम्मीदें उसके प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती हैं। कृतिका ने इस विचार को समझा और अपनी सोच पर काम करना शुरू किया।
दो प्रयासों में मिली बड़ी सफलता
इसके बाद, कृतिका ने अपनी किताबों, नोट्स और तैयारी की रणनीति के साथ आत्मविश्वास पर भी ध्यान दिया। उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने यूपीएससी 2018 में 194वीं रैंक हासिल की। इसके बाद, यूपीएससी 2019 में उनकी रैंक सुधरकर 100वीं हो गई। आज, वह एक आईआरएस अधिकारी हैं।
