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जैनेंद्रजीत की प्रेरणादायक कहानी: 10वीं के कम अंकों से IIT बॉम्बे तक का सफर

जैनेंद्रजीत की कहानी एक प्रेरणादायक यात्रा है, जो 10वीं के कम अंकों से शुरू होकर IIT बॉम्बे तक पहुंचती है। उनकी मेहनत और अनुशासन ने उन्हें JEE Main में 99.98 परसेंटाइल और JEE Advanced में ऑल इंडिया रैंक 349 दिलाई। यह कहानी उन छात्रों के लिए एक उदाहरण है जो असफलता के बाद खुद को कमजोर समझते हैं। जैनेंद्रजीत ने साबित किया कि सही दिशा और मेहनत से कोई भी अपनी कहानी बदल सकता है।
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बेतिया के जैनेंद्रजीत की संघर्षपूर्ण यात्रा


बेतिया: 10वीं का परिणाम अक्सर छात्रों के आत्मविश्वास को प्रभावित करता है। जब अंक अपेक्षा से कम होते हैं, तो समाज की टिप्पणियाँ और भी कष्टदायक हो जाती हैं। बिहार के पश्चिम चम्पारण के जैनेंद्रजीत ने भी ऐसे ही अनुभव का सामना किया। उनकी 10वीं की मार्कशीट देखकर लोग उन पर हंसते थे। मैथ्स में केवल 41 अंक और कुल 54 प्रतिशत ने उन्हें निराश कर दिया था। लेकिन उन्होंने इस परिणाम को अपनी पहचान नहीं बनने दिया।


बीमारी ने परीक्षा की तैयारी को प्रभावित किया

जैनेंद्रजीत ने बेतिया के वृंदावन स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय से शिक्षा प्राप्त की। 10वीं की परीक्षा से पहले, बीमारी के कारण उन्हें लंबे समय तक बिस्तर पर रहना पड़ा, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हुई। लगभग 40 से 50 दिनों तक पढ़ाई न कर पाने के कारण, उन्हें मैथ्स में 41, साइंस में 48, हिंदी में 49, सोशल साइंस में 54 और इंग्लिश में 79 अंक मिले।


कम अंकों के बाद का संघर्ष

रिजल्ट आने के बाद जैनेंद्रजीत के लिए स्थिति कठिन हो गई। उन्होंने उम्मीद की थी कि बोर्ड परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करेंगे, लेकिन मार्कशीट देखकर खुद भी निराश हो गए। उनके कई सहपाठियों ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए थे। इसके चलते, उन्हें तानों और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा, लेकिन यही अनुभव उनके लिए खुद को साबित करने का कारण बना।


नई रणनीति और बड़े लक्ष्य

कम अंकों पर बैठने के बजाय, जैनेंद्रजीत ने आगे की तैयारी पर ध्यान केंद्रित किया। जेईई मेन और जेईई एडवांस की तैयारी के दौरान, उन्होंने एक नियमित दिनचर्या बनाई। उन्होंने सोशल मीडिया और अन्य ध्यान भटकाने वाली चीजों को सीमित किया और धीरे-धीरे पढ़ाई का समय बढ़ाकर लगभग 10 घंटे प्रतिदिन कर लिया। बड़े लक्ष्य को छोटे हिस्सों में बांटकर, उन्होंने रोजाना के लक्ष्यों को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित किया।


पुस्तकों और पुराने प्रश्नपत्रों का उपयोग

जेईई की तैयारी में, जैनेंद्रजीत ने केवल पढ़ाई के घंटे बढ़ाने पर निर्भर नहीं किया। क्लास से पहले, उन्होंने शैक्षणिक वीडियो देखकर विषय की प्रारंभिक समझ विकसित की। इससे लेक्चर के दौरान कठिन अवधारणाओं पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिली। उन्होंने पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र हल किए और मॉक टेस्ट भी दिए, जिससे परीक्षा के पैटर्न को समझने में मदद मिली।


मेहनत का फल JEE Main में मिला

लगातार मेहनत और अनुशासन का परिणाम परीक्षा के नतीजों में स्पष्ट दिखाई दिया। जैनेंद्रजीत ने JEE Main 2023 में 99.98 परसेंटाइल प्राप्त किया। इसके बाद, JEE Advanced में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया रैंक 349 हासिल की। 10वीं के 54 प्रतिशत से शुरू हुआ यह सफर अब पूरी तरह बदल चुका था। जिस रिजल्ट को कभी उनकी कमजोरी माना गया, वही उनकी कहानी का प्रारंभिक मोड़ बन गया।


IIT बॉम्बे में दाखिला और नई शुरुआत

JEE में उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद, जैनेंद्रजीत को IIT बॉम्बे के कंप्यूटर साइंस प्रोग्राम में दाखिला मिला। उनकी कहानी उन छात्रों के लिए प्रेरणा है जो किसी एक परीक्षा या कम अंकों के कारण खुद को कमजोर समझने लगते हैं। उनका सफर यह दर्शाता है कि एक खराब परिणाम भविष्य की सीमाएँ निर्धारित नहीं करता। सही दिशा, निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास से, कोई भी छात्र अपनी कहानी को पूरी तरह बदल सकता है।