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डाकघर बचत योजनाओं में नया मेकर-चेकर सिस्टम लागू, ब्याज में बदलाव के लिए कड़े नियम

डाकघर की बचत योजनाओं में ब्याज की गणना में सुधार के लिए एक नया मेकर-चेकर सिस्टम लागू किया गया है। इस प्रणाली के तहत, ब्याज में किसी भी प्रकार का बदलाव अब दो स्तरों पर सत्यापन के बाद ही संभव होगा। यह कदम वित्तीय पारदर्शिता को बढ़ाने और मानवीय त्रुटियों को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है। सभी प्रमुख योजनाओं जैसे PPF, सुकन्या समृद्धि योजना और सीनियर सिटीजन्स सेविंग्स स्कीम पर इसका प्रभाव पड़ेगा। जानें इस नई व्यवस्था के बारे में विस्तार से।
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नई व्यवस्था का परिचय

नई दिल्ली: डाकघर की विभिन्न बचत योजनाओं में निवेश करने वाले करोड़ों खाताधारकों के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना आई है। डाक विभाग ने बचत खातों में ब्याज की गणना में बदलाव करने की प्रक्रिया में एक बड़ा प्रशासनिक सुधार किया है। अब ब्याज में किसी भी प्रकार का परिवर्तन सीधे दर्ज नहीं किया जा सकेगा, बल्कि इसके लिए 'मेकर-चेकर' प्रणाली के तहत दो स्तरों पर सत्यापन और मंजूरी आवश्यक होगी। इस नए नियम का उद्देश्य ब्याज की गणना में होने वाली मानवीय त्रुटियों, तकनीकी समस्याओं और अनधिकृत परिवर्तनों को रोकना है।


सभी प्रमुख योजनाओं पर प्रभाव

PPF, सुकन्या और सीनियर सिटीजन स्कीम पर असर
डाक विभाग के इस नए आदेश का प्रभाव डाकघर बचत खाता, पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF), सुकन्या समृद्धि योजना, नेशनल सेविंग्स स्कीम, मंथली इनकम स्कीम और सीनियर सिटीजन्स सेविंग्स स्कीम जैसी प्रमुख योजनाओं पर पड़ेगा। यदि किसी खाताधारक के ब्याज में कोई विसंगति होती है, तो उसे सुधारने के लिए अब एक लंबी और पारदर्शी जांच प्रक्रिया से गुजरना होगा।


पुरानी और नई व्यवस्था में अंतर

पहले की प्रक्रिया और वर्तमान बदलाव
पहले, ब्याज में संशोधन का कार्य एसबीसीओ सुपरवाइजर की प्रारंभिक मंजूरी के बाद सीधे सिस्टम में दर्ज किया जाता था। इसके बाद सॉफ्टवेयर में उस एंट्री की स्वतंत्र जांच नहीं होती थी। अब नई व्यवस्था में जवाबदेही को दो भागों में बांट दिया गया है। संबंधित हेड पोस्ट ऑफिस का एसबीसीओ सुपरवाइजर ब्याज एडजस्टमेंट की एंट्री करेगा, जबकि सर्किल स्तर का सीपीसी सुपरवाइजर दस्तावेजों का मिलान कर उसे सत्यापित करेगा। दोनों स्तरों की पुष्टि के बिना कोई भी ब्याज अपडेट नहीं हो सकेगा।


सुधार प्रक्रिया का विवरण

हेड पोस्टमास्टर से डिविजनल हेड तक फाइल का प्रवाह
यदि किसी खाताधारक के खाते में ब्याज की गणना गलत पाई जाती है, तो सबसे पहले संबंधित हेड पोस्टमास्टर सभी दस्तावेजों की जांच करेंगे। इसके बाद पूरी रिपोर्ट डिविजनल हेड के पास भेजी जाएगी। डिविजनल हेड मामले की समीक्षा के बाद ही एडजस्टमेंट प्रस्ताव को मंजूरी देंगे या खारिज करेंगे। उनकी स्वीकृति के बाद ही एसबीसीओ सुपरवाइजर सिस्टम में डेटा फीड करेगा।


ब्याज संशोधन की सीमाएं

मूलधन में कोई बदलाव नहीं
डाक विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया 'एचआईएआरएम' (HIARM – Interest Adjustment Register Maintenance) मेन्यू के माध्यम से संचालित होती है। इस प्रणाली से केवल जमा ब्याज की राशि में संशोधन किया जा सकता है, जबकि खाते के मूलधन में कोई छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। नए नियमों के अनुसार, स्थानीय स्तर पर अधिकतम 5 लाख रुपये तक के ब्याज संशोधन की अनुमति है। यदि ब्याज विसंगति 5 लाख रुपये से अधिक है, तो उस मामले को सीपीआरसी चेन्नई भेजा जाएगा। इसके अलावा, एससीएसएस और एमआईएस खातों में ब्याज सुधार के लिए केवल बिगिनिंग ऑफ डे की तारीख मान्य होगी। इस कदम से डाकघर की बचत योजनाओं में वित्तीय पारदर्शिता और सुरक्षा में वृद्धि होगी।