प्रशांत उइके की प्रेरणादायक यात्रा: संघर्ष से सफलता की ओर
प्रेरणादायक यात्रा:
सफलता के बाद जीवन हमेशा सरल हो, यह आवश्यक नहीं है। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के निवासी प्रशांत उइके ने कम उम्र में वह उपलब्धि हासिल की, जिसका सपना कई युवा देखते हैं। उन्होंने केवल 20 वर्ष की आयु में MPPSC परीक्षा उत्तीर्ण कर DSP का पद प्राप्त किया। यह उनके परिवार के लिए गर्व का क्षण था, लेकिन कुछ ही दिनों बाद एक सड़क दुर्घटना ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी।
दुर्घटना के बाद की चुनौतियाँ
इस हादसे में प्रशांत के पैर में गंभीर चोट आई और गैंग्रीन के कारण उन्हें कई सर्जरी से गुजरना पड़ा। पुलिस की फील्ड ड्यूटी के लिए उनकी शारीरिक स्थिति अनुकूल नहीं रही, इसलिए उन्होंने DSP की नौकरी छोड़ने का कठिन निर्णय लिया। घर लौटने के बाद उन्हें न केवल दर्द का सामना करना पड़ा, बल्कि लोगों की टिप्पणियों का भी सामना करना पड़ा। कई लोग उन पर हंसते थे और तरह-तरह की बातें बनाते थे, लेकिन प्रशांत ने खुद को टूटने नहीं दिया।
सपनों की शुरुआत बैतूल से
प्रशांत ने बताया कि उन्होंने 2016 में MPPSC की तैयारी शुरू की थी। लगातार मेहनत और सही दिशा में पढ़ाई के बल पर उन्होंने कम उम्र में ही परीक्षा में सफलता प्राप्त की और DSP बने। बैतूल जैसे आदिवासी बहुल जिले से निकलकर यह उपलब्धि उनके और उनके परिवार के लिए बेहद खास थी। उन्हें उम्मीद थी कि अब करियर की राह आगे बढ़ेगी, लेकिन हादसे ने अचानक उनके सामने नई चुनौती खड़ी कर दी।
समाज के कटाक्षों का सामना
नौकरी छोड़ने के बाद प्रशांत को समाज के कटाक्षों का सामना करना पड़ा। कुछ लोगों ने यह कहना शुरू कर दिया कि उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया है। उन्हें 'नासमझ' कहे जाने की बातें भी सामने आईं और उनके पिता को भी सलाह दी जाती थी। शारीरिक पीड़ा और आर्थिक परेशानियों के बीच यह समय आसान नहीं था। फिर भी, प्रशांत ने तय किया कि इन बातों का जवाब बहस से नहीं, बल्कि अपनी अगली सफलता से देंगे।
9 जून 2023: एक नई शुरुआत
प्रशांत ने फिर से MPPSC की तैयारी शुरू की। कोविड लॉकडाउन और आर्थिक तंगी जैसी परेशानियाँ भी उनके रास्ते में आईं, लेकिन उन्होंने पढ़ाई जारी रखी। 2019 और 2020 की परीक्षाओं के दौरान उन्होंने अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखा। अंततः 9 जून 2023 की शाम उनके लिए यादगार बन गई। परिणाम आया और इस बार उन्हें डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयन मिला। जिस व्यक्ति ने कभी DSP की वर्दी छोड़ी थी, उसने फिर से प्रशासनिक सेवा में अपनी जगह बना ली।
