प्रिया आर्या: कठिनाइयों से जूझकर मिली सफलता की कहानी
सफलता की प्रेरक कहानी
कहते हैं कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ आएं, अगर इंसान हार नहीं मानता, तो एक दिन सफलता अवश्य मिलती है। बिहार के पटना की प्रिया आर्या की कहानी इसी जज्बे का प्रतीक है। प्रिया ने 10वीं में 90% और 12वीं में 80% अंक प्राप्त किए। इसके बाद उन्होंने नॉटिकल साइंस की पढ़ाई की और मर्चेंट नेवी में एक अच्छी सैलरी वाली नौकरी पाई। लेकिन कोरोना महामारी के दौरान उनकी नौकरी चली गई, जिससे उनकी जिंदगी एक कठिन दौर में पहुंच गई।
डिप्रेशन से उबरने की प्रेरणा
प्रिया ने एक समय डिप्रेशन का सामना किया। नौकरी जाने के बाद उन्हें अपने भविष्य में अंधकार नजर आने लगा। इस कठिन समय में उनके माता-पिता ने यूट्यूब पर खान सर के वीडियो देखे। इन वीडियो से प्रेरित होकर प्रिया ने सरकारी नौकरी की तैयारी करने का निर्णय लिया। वह खुद को इस मुश्किल दौर से बाहर निकालने में खान सर का योगदान मानती हैं।
शिक्षा में उत्कृष्टता
प्रिया के पिता सरकारी नौकरी में थे, जिसके कारण उन्हें बचपन में कई बार स्कूल बदलना पड़ा। बार-बार स्कूल बदलने के बावजूद, उन्होंने पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित रखा। 2012 में 90% अंकों के साथ 10वीं की परीक्षा पास की और 2014 में 80% अंकों के साथ 12वीं की पढ़ाई पूरी की।
इसके बाद प्रिया उच्च शिक्षा के लिए मुंबई चली गईं और नवी मुंबई से नॉटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया। 2018 में लगभग 80% ग्रेड के साथ डिग्री पूरी करने के बाद, उन्होंने मर्चेंट नेवी में करियर बनाने का निर्णय लिया।
कोरोना के प्रभाव और मानसिक संघर्ष
मर्चेंट नेवी में नौकरी शुरू करने के कुछ समय बाद ही कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया। लॉकडाउन के दौरान प्रिया की नौकरी चली गई, जिससे वह मानसिक रूप से परेशान हो गईं।
उन्होंने एक टीवी कार्यक्रम में अपनी कहानी साझा करते हुए बताया कि नौकरी जाने के बाद वह डिप्रेशन में चली गई थीं। इसी समय उनके माता-पिता ने खान सर के वीडियो देखे और उन्हें सरकारी नौकरी की तैयारी के लिए प्रेरित किया। प्रिया के अनुसार, 'खान सर ने मुझे मौत के मुंह से निकाला है।' माता-पिता के प्रोत्साहन के बाद, उन्होंने ऑनलाइन पढ़ाई शुरू की और धीरे-धीरे अपनी जिंदगी को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश की।
पहली असफलता और सीख
सरकारी नौकरी की तैयारी के दौरान प्रिया को पहली बार सफलता नहीं मिली। वह BPSC प्रीलिम्स पास नहीं कर सकीं। लेकिन इस असफलता ने उन्हें अपनी कमियों को समझने का अवसर दिया।
उन्होंने सेल्फ स्टडी, ऑनलाइन पढ़ाई और अपने बनाए नोट्स पर भरोसा किया। साथ ही पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों को अपनी तैयारी का आधार बनाया। उन्होंने अपनी कमजोरियों की पहचान की और दूसरी कोशिश में पहले से ज्यादा मेहनत के साथ परीक्षा की तैयारी की।
दूसरे प्रयास में मिली सफलता
प्रिया की मेहनत रंग लाई। दूसरे प्रयास में उन्होंने BPSC 69वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा में 263वीं रैंक हासिल की। इस सफलता के साथ उनका चयन लेबर एन्फोर्समेंट ऑफिसर (LEO) के पद पर हुआ। मर्चेंट नेवी की नौकरी जाने से लेकर डिप्रेशन और पहली असफलता तक, प्रिया ने कई कठिनाइयों का सामना किया। लेकिन उन्होंने हर बार खुद को संभाला और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती रहीं।
आगे की योजनाएँ
प्रिया ने अपनी पढ़ाई और करियर को यहीं नहीं रोका। मार्च 2026 में उन्होंने IIM रायपुर से MBA की पढ़ाई पूरी की। अब उनका अगला लक्ष्य UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास करना है। प्रिया आर्या की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो किसी असफलता या कठिन परिस्थिति के बाद खुद को कमजोर समझने लगते हैं। उनकी यात्रा यह दर्शाती है कि नौकरी छूटने, परीक्षा में असफल होने या कठिन दौर से गुजरने के बाद भी नई शुरुआत की जा सकती है। सही दिशा, परिवार का समर्थन और निरंतर मेहनत से जीवन को बदला जा सकता है।
