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प्रिया कुमारी की UPSC यात्रा: संघर्ष और सफलता की कहानी

प्रिया कुमारी की कहानी एक प्रेरणादायक यात्रा है, जिसमें उन्होंने कठिनाइयों का सामना करते हुए UPSC परीक्षा में सफलता प्राप्त की। बिहार के एक छोटे से गांव से शुरू होकर, प्रिया ने पारिवारिक दबाव और असफलताओं के बावजूद अपने सपनों का पीछा किया। उनकी मेहनत और सही अध्ययन विधियों ने उन्हें 232वीं रैंक हासिल करने में मदद की। जानें कैसे उन्होंने अपने लक्ष्य को हासिल किया और प्रेरणा का स्रोत बनीं।
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प्रिया कुमारी की प्रेरणादायक यात्रा


कुछ सपने ऐसे होते हैं, जिनके रास्ते में कई बाधाएं आती हैं। बिहार की प्रिया कुमारी की कहानी भी इसी तरह की है। पटना के एक छोटे से गांव से शुरू हुआ उनका सफर पढ़ाई, नौकरी और अंततः UPSC की तैयारी तक पहुंचा। इस दौरान उन्हें परिवार की ओर से शादी का दबाव और परीक्षा में असफलताओं का सामना करना पड़ा। लेकिन प्रिया ने अपने सपनों को कभी भी कमजोर नहीं होने दिया और लगातार प्रयास करती रहीं।


शिक्षा में उत्कृष्टता

प्रिया ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सरकारी स्कूल से प्राप्त की। वह हमेशा से पढ़ाई में अच्छी रहीं और 12वीं कक्षा में 94 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसके बाद, उन्होंने कंपनी सेक्रेटरी (CS) की परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 21 प्राप्त की। उनकी मेहनत और उपलब्धियों ने उन्हें आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया। UPSC की तैयारी शुरू करने के बाद, रास्ता कठिन हो गया, लेकिन उन्होंने हर असफलता से सीख ली और अपनी तैयारी के तरीके में सुधार किया।


परिवार का दबाव और लक्ष्य की दृढ़ता

UPSC की तैयारी के दौरान प्रिया को पारिवारिक परंपराओं का सामना करना पड़ा। उनके दादा और पिता चाहते थे कि वह शादी कर लें। फिर भी, प्रिया ने अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा। उन्होंने परिवार को बताया कि वह अपनी नौकरी से होने वाली आय से अपनी तैयारी का खर्च उठाएंगी। उनकी मां और भाई ने उनका समर्थन किया, जिससे वह अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर सकीं।


कठिनाइयों का सामना

UPSC का सफर प्रिया के लिए आसान नहीं रहा। उन्होंने पहले प्रयास में बिना पर्याप्त तैयारी के परीक्षा दी और प्रीलिम्स में लगातार असफल रहीं। 2023 और 2024 के प्रयासों में वह क्रमशः एक और दो अंकों से पीछे रह गईं।


सही अध्ययन सामग्री का चयन

प्रिया ने अपनी तैयारी के दौरान अध्ययन की विधि में महत्वपूर्ण बदलाव किया। उन्होंने अपनी पुरानी और अनावश्यक किताबें बेच दीं। उनका मानना था कि बहुत अधिक अध्ययन सामग्री तैयारी में मदद करने के बजाय बोझ बन रही थी। इसके बाद, उन्होंने लगभग 25-30 मुख्य किताबों का चयन किया और उन्हीं पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने सोशियोलॉजी को वैकल्पिक विषय के रूप में चुना और स्थिर विषयों की तैयारी पर विशेष ध्यान दिया। अंततः, उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में UPSC CSE 2025 में 232वीं रैंक हासिल की। इंटरव्यू में उन्हें 194 अंक मिले।