प्रीति शर्मा की प्रेरणादायक कहानी: पढ़ाई में वापसी और सफलता की नई ऊँचाइयाँ
प्रेरणादायक यात्रा:
कई बार जीवन में ऐसा समय आता है जब हमें लगता है कि हमारे सपने कभी पूरे नहीं होंगे। शादी, बच्चों और घरेलू जिम्मेदारियों के चलते शिक्षा पीछे छूट जाती है। लेकिन उत्तर प्रदेश की प्रीति शर्मा की कहानी इस धारणा को पूरी तरह बदल देती है। सहारनपुर में जन्मी प्रीति ने शादी के बाद दिल्ली में नई शुरुआत की और वो कर दिखाया जो अधिकांश लोग सोचने से भी कतराते हैं। प्रीति का ससुराल बागपत जिले के बरवाला गांव में है। शादी के समय उनके पास केवल बैचलर डिग्री थी, लेकिन शादी के बाद उन्होंने न केवल मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की, बल्कि ETT कोर्स भी किया। इस सफर में उनके पति ने हर कदम पर उनका समर्थन किया।
पति का समर्थन: जीवन में बदलाव
प्रीति ने अध्ययन मंत्रा यूट्यूब चैनल पर दिए गए एक इंटरव्यू में बताया कि उनके पति ने हमेशा उनका साथ दिया और उन्हें विश्वास दिलाया कि वे यह कर सकती हैं। यही विश्वास उनकी सबसे बड़ी ताकत बना। शादी के बाद दो बेटियों की परवरिश और घरेलू जिम्मेदारियों के बीच पढ़ाई से उनका नाता लगभग टूट गया था, लेकिन पति के समर्थन ने उन्हें फिर से हिम्मत जुटाने का अवसर दिया।
9 साल बाद फिर से पढ़ाई की शुरुआत
साल 2019 में जब केवीएस और सीटेट की परीक्षाएं आईं, तब प्रीति ने 9 साल के अंतराल के बाद फिर से पढ़ाई शुरू की। इससे पहले भी उन्होंने कई बार फॉर्म भरे थे, लेकिन किसी न किसी कारणवश परीक्षा तक नहीं पहुंच पाईं। इस बार उनके पति ने कोचिंग करवाई और देवरानी व सास-ससुर ने भी घर के कामों में मदद की, जिससे उन्हें तैयारी के लिए समय मिल सका।
रात की पढ़ाई: सफलता की कुंजी
प्रीति बताती हैं कि दिन में प्राइवेट स्कूल में नौकरी और घर के कामों के चलते उन्होंने रात में पढ़ाई करने का निर्णय लिया। वे रोज रात लगभग 10-10:30 बजे किताबें लेकर बैठतीं और सुबह तक पढ़ाई करती थीं। कई बार मुश्किल से दो-तीन घंटे ही नींद मिल पाती थी, लेकिन उन्होंने अपने रूटीन में कभी ढिलाई नहीं आने दी।
देश में छठी रैंक हासिल की
उनकी मेहनत रंग लाई और प्रीति ने केवीएस परीक्षा में 180 में से 155 अंक प्राप्त कर पूरे देश में छठी रैंक हासिल की। तैयारी के दौरान उन्होंने यूट्यूब वीडियो से नोट्स बनाए, रंगीन पेन तकनीक का उपयोग किया और इंटरव्यू की झिझक दूर करने के लिए बार-बार मॉक इंटरव्यू दिए। तानों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आज वे लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।
