भारत में जेन-जी पेशेवरों की नेटवर्किंग में झिझक: रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
जेन-जी पेशेवरों की नेटवर्किंग में चुनौतियाँ
हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में जेन-जी पेशेवरों की एक बड़ी संख्या करियर में मददगार लोगों से संपर्क करने में संकोच कर रही है। लगभग 83 प्रतिशत युवा पेशेवर नेटवर्किंग में हिचकिचाते हैं। जबकि 79 प्रतिशत युवा पेशेवर संबंधों के महत्व को समझते हैं, 52 प्रतिशत को यह नहीं पता कि शुरुआत कैसे करें।
डर और अनिश्चितता का प्रभाव
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 44 प्रतिशत युवा जज किए जाने के डर से पीछे हट जाते हैं। इसके अलावा, दूसरों को परेशान करने का डर (39%) और खुद को अवास्तविक समझे जाने की चिंता (37%) उनके लिए बड़ी बाधाएं बनती हैं। लिंक्डइन के आंकड़ों के अनुसार, जिन नौकरी आवेदकों के पास अंदरूनी संपर्क होते हैं, उनकी चुने जाने की संभावना अन्य की तुलना में 8.5 गुना अधिक होती है।
मार्गदर्शन की कमी
रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 59 प्रतिशत जेन-जी पेशेवरों का मानना है कि उन्हें कभी भी पेशेवर संबंध बनाने की शिक्षा नहीं दी गई। सही मार्गदर्शन की कमी के कारण, वे यह नहीं समझ पाते कि किससे, कब और कैसे संपर्क करना चाहिए।
सीनियर पीढ़ी का सहयोग
युवाओं की इस झिझक के विपरीत, पुरानी पीढ़ी मदद के लिए तत्पर है। सर्वेक्षण में शामिल 92 प्रतिशत मिलेनियल्स और 95 प्रतिशत जेन-एक्स पेशेवरों ने कहा कि वे किसी भी शुरुआती करियर वाले व्यक्ति की सहायता करने के लिए तैयार हैं। लिंक्डइन की विशेषज्ञ नीराजीता बनर्जी का कहना है कि छोटे-छोटे संवाद विश्वास स्थापित करते हैं और भविष्य में नए अवसरों के द्वार खोलते हैं।
