भारत में युवा बेरोजगारी: शिक्षा और रोजगार के बीच की खाई
भारत में युवा बेरोजगारी की समस्या
हर साल, भारत में लाखों युवा कॉलेज और विश्वविद्यालयों से अपनी डिग्री लेकर बाहर आते हैं, लेकिन उनकी पढ़ाई के अनुसार नौकरी पाने वाले छात्रों की संख्या बहुत कम है। नीति आयोग की अगस्त में प्रकाशित रिपोर्ट 'Reimagining Skilling for Viksit Bharat @2047' के अनुसार, केवल 8.25 प्रतिशत स्नातक ही अपनी योग्यताओं के अनुसार कार्यरत हैं। यह आंकड़ा यह दर्शाता है कि समस्या केवल बेरोजगारी की नहीं है, बल्कि शिक्षा और रोजगार के बीच एक गहरा संबंध भी है।
पाठ्यक्रम और उद्योग की आवश्यकताओं में असंगति
नीति आयोग ने उच्च और तकनीकी शिक्षा में मौलिक असंगति की ओर ध्यान आकर्षित किया है। कई शैक्षणिक संस्थानों में पाठ्यक्रम औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुसार अपडेट नहीं किए गए हैं। इसके परिणामस्वरूप, BA, BSc और BCom जैसी सामान्य डिग्रियां सीधे रोजगार की गारंटी नहीं देतीं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कई छात्र इन पाठ्यक्रमों को सरकारी नौकरियों के लिए पात्रता प्राप्त करने के उद्देश्य से चुनते हैं।
व्यावहारिक कौशल की कमी
रिपोर्ट में उन समस्याओं का भी उल्लेख किया गया है जो छात्रों के लिए नौकरी पाने में बाधा बनती हैं। लगभग 34 प्रतिशत छात्र कौशल की कमी को एक बड़ी समस्या मानते हैं, जबकि 18 प्रतिशत ने इंटरव्यू की तैयारी में कमी की बात की। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि 80 प्रतिशत छात्रों ने व्यावहारिक अनुभव और उद्योग से जुड़ाव की कमी को एक प्रमुख चुनौती माना।
सरकारी नौकरी की ओर झुकाव
शिक्षा और निजी क्षेत्र की आवश्यकताओं के बीच की दूरी युवाओं की सरकारी नौकरियों के प्रति बढ़ती रुचि को भी दर्शाती है। नीति आयोग के अनुसार, नवंबर 2024 से जुलाई 2025 के बीच केवल 55 हजार पदों के लिए 1.86 करोड़ आवेदन प्राप्त हुए। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा है कि शिक्षा प्रणाली को युवाओं को नौकरी के साथ-साथ उद्यमिता और स्वरोजगार के लिए भी तैयार करना चाहिए।
कॉलेज और नौकरी के बीच पुल का निर्माण
नीति आयोग ने व्यावहारिक शिक्षा, इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप और उद्योग के साथ बेहतर तालमेल की आवश्यकता को रेखांकित किया है। छात्रों को CV बनाने, मॉक इंटरव्यू और नौकरी खोजने जैसी तैयारियों में मदद मिलनी चाहिए। हालांकि, केवल नाममात्र की इंटर्नशिप पर्याप्त नहीं होगी। युवाओं को वास्तविक कार्य अनुभव प्रदान करना आवश्यक है, तभी उनकी डिग्री को रोजगार योग्य कौशल में बदला जा सकेगा।
