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शेफकार्ट: एक सफल स्टार्टअप की प्रेरणादायक कहानी

शेफकार्ट की कहानी एक प्रेरणादायक यात्रा है, जिसमें वैभव गुप्ता और अमन गुप्ता ने एक साधारण समस्या को व्यवसाय में बदल दिया। इस स्टार्टअप ने न केवल ग्राहकों के लिए शेफ उपलब्ध कराए, बल्कि शेफ्स की जिंदगी में भी सकारात्मक बदलाव लाए। जानें कैसे यह स्टार्टअप हर महीने करोड़ों की कमाई कर रहा है और नए सेवाओं के साथ विस्तार की योजना बना रहा है।
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प्रेरणादायक यात्रा:


कभी-कभी सबसे प्रभावशाली व्यापारिक विचार रोजमर्रा की छोटी समस्याओं से उत्पन्न होते हैं। वैभव गुप्ता के साथ भी ऐसा ही हुआ, जब उन्हें एक विश्वसनीय शेफ खोजने में कठिनाई हुई, तो उन्होंने इस समस्या को अपने व्यवसाय का आधार बना लिया। आईआईटी खड़गपुर के स्नातक वैभव और उनके साथी अमन गुप्ता ने कॉर्पोरेट नौकरी की स्थिरता को छोड़कर एक अनिश्चित लेकिन रोमांचक रास्ता चुना। आज उनका स्टार्टअप 'शेफकार्ट' न केवल हजारों घरों की रसोई का संचालन कर रहा है, बल्कि हर महीने लगभग 1 करोड़ रुपये की आय भी अर्जित कर रहा है।


नौकरी के दौरान आया बिजनेस का आइडिया

जब वैभव गुरुग्राम में अमेरिकन एक्सप्रेस में बिजनेस एनालिस्ट के रूप में कार्यरत थे, तब उन्हें एक अच्छा शेफ खोजने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा। सुरक्षा गार्डों या दोस्तों पर निर्भर रहकर कुक ढूंढने में न तो पारदर्शिता थी और न ही विकल्प। इससे पहले, उन्होंने कॉलेज के दिनों में लॉन्ड्री सेवा 'क्रीज' की शुरुआत की थी। इसी अनुभव और कुछ नया करने की इच्छा ने उन्हें अप्रैल 2020 में नौकरी छोड़कर अमन गुप्ता के साथ मिलकर शेफकार्ट की स्थापना के लिए प्रेरित किया।


महामारी में मिली बड़ी मदद

मई 2020 में जब कोरोना महामारी अपने चरम पर थी, तब इस स्टार्टअप ने गुरुग्राम में अपनी शुरुआत की। प्रारंभिक दिनों में ग्राहकों की प्रतिक्रिया धीमी रही, लेकिन नौकरी खो चुके कई कुक इस प्लेटफॉर्म से जुड़ने लगे। बिना महंगे विज्ञापनों के, फेसबुक ग्रुप्स और व्यक्तिगत कॉल्स के माध्यम से विश्वास स्थापित किया गया। सख्त हाइजीन मानकों के कारण सितंबर 2020 तक मांग तेजी से बढ़ने लगी।


शेफ्स की जिंदगी में भी आया बदलाव

इस स्टार्टअप ने न केवल ग्राहकों की समस्याओं का समाधान किया, बल्कि शेफ्स की जिंदगी में भी बदलाव लाया। पहले कुक को सुरक्षा गार्डों को कमीशन देना पड़ता था और लेन-देन नकद में होता था, जिससे बैंक लोन प्राप्त करना मुश्किल था। अब हर शेफ के पास बैंक खाता है, उन्हें दैनिक भुगतान मिलता है, और लगभग 2 लाख रुपये का बीमा कवर भी मिलता है। कई सिंगल मदर हर महीने 40 हजार रुपये तक कमा रही हैं।


अब हर महीने करोड़ों की कमाई

वर्तमान में, शेफकार्ट गुरुग्राम में मजबूत स्थिति में है और हर महीने लगभग 1 करोड़ रुपये की आय अर्जित कर रहा है, जो सालाना 12 से 13 करोड़ रुपये के आसपास है। जोमैटो के सह-संस्थापक दीपिंदर गोयल जैसे प्रमुख निवेशक भी इसमें शामिल हो चुके हैं। कंपनी अब दिल्ली और बेंगलुरु में विस्तार के साथ-साथ मील प्लानिंग और ग्रोसरी शॉपिंग जैसी नई सेवाएं जोड़ने की योजना बना रही है।