सुरभि गौतम: संघर्ष से सफलता की ओर एक प्रेरणादायक यात्रा
प्रेरणादायक यात्रा
सुरभि गौतम, जो एक छोटे से गांव में जन्मी थीं, को अपनी अंग्रेजी भाषा के लिए मजाक का सामना करना पड़ा। जब वह शहर के कॉलेज में पहुंचीं, तो भाषा की बाधाओं ने उन्हें कई चुनौतियों का सामना करने पर मजबूर किया। लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी मानने के बजाय इसे सुधारने का निर्णय लिया। नियमित अभ्यास और मेहनत के माध्यम से, सुरभि ने अपनी अंग्रेजी में सुधार किया और पढ़ाई में लगातार प्रगति की।
बचपन से पढ़ाई में अव्वल
सुरभि का जन्म 21 अगस्त 1991 को हुआ। उनके पिता एक वकील और मां एक शिक्षिका हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव के सरकारी स्कूल में हुई। पांचवीं कक्षा में, उन्होंने गणित में 100 में से 100 अंक प्राप्त किए। 10वीं और 12वीं कक्षा में भी उनके अंक 90 प्रतिशत से अधिक रहे, जिसने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
अंग्रेजी की चुनौती और तैयारी
हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने के बाद, जब सुरभि शहर के कॉलेज में गईं, तो अंग्रेजी उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गई। पहले दिन, उन्हें अंग्रेजी में अपना परिचय देने में कठिनाई हुई और कुछ छात्रों ने उनका मजाक उड़ाया। एक शिक्षक ने भी उनकी योग्यता पर सवाल उठाया। इसके बाद, उन्होंने रोजाना 10 नए अंग्रेजी शब्द सीखने और शीशे के सामने बोलने का अभ्यास शुरू किया।
इंजीनियरिंग के बाद नौकरी छोड़ना
सुरभि ने भोपाल की राजीव गांधी टेक्निकल यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन में बीई की डिग्री प्राप्त की। वह कॉलेज की टॉपर रहीं और उन्हें चांसलर अवॉर्ड भी मिला। पढ़ाई के बाद, उन्हें टीसीएस में एक अच्छी सैलरी वाली नौकरी मिली, लेकिन उन्होंने अपने सिविल सेवा के सपने को पूरा करने के लिए नौकरी छोड़ने का निर्णय लिया।
कई परीक्षाओं में सफलता और IAS बनना
सुरभि ने 2013 में यूपीएससी इंजीनियरिंग सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 1 प्राप्त की। इसके अलावा, उन्होंने एमपीपीएससी, पीसीएस, इसरो, बार्क साइंटिस्ट परीक्षा, गेट, सेल, एसएससी सीजीएल, दिल्ली पुलिस सब इंस्पेक्टर और एफसीआई जैसी कई परीक्षाएं भी पास कीं। अंततः, 2016 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग को वैकल्पिक विषय चुनकर 50वीं रैंक हासिल की और IAS अधिकारी बनीं। वर्तमान में, वह गुजरात के दाहोद जिले की कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट के रूप में कार्यरत हैं।
