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जामनगर में मुकेश अंबानी का विशाल आम का बाग: एक अनोखी हरित पहल

जामनगर में मुकेश अंबानी का धीरूभाई अंबानी लखीबाग अमराई एक विशाल आम का बाग है, जिसमें 1.5 लाख से अधिक फल देने वाले पेड़ और 200 से ज्यादा आम की किस्में हैं। यह बाग पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से स्थापित किया गया था और अब यह एक महत्वपूर्ण कृषि एस्टेट बन चुका है। यहां भारतीय और विदेशी आमों की विविधता देखने को मिलती है, जो इसे खास बनाती है। जानें इस अनोखी हरित पहल के बारे में और कैसे यह औद्योगिक क्षेत्र के आसपास विकसित हुआ।
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धीरूभाई अंबानी लखीबाग अमराई: एक हरित परियोजना


रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रमुख मुकेश अंबानी का नाम भारत के प्रमुख उद्योगपतियों में शामिल है, लेकिन उनके व्यवसाय के साथ एक दिलचस्प पहल खेती और पर्यावरण से जुड़ी है। गुजरात के जामनगर में रिलायंस के रिफाइनरी परिसर के निकट एक विशाल आम का बाग है, जिसे धीरूभाई अंबानी लखीबाग अमराई के नाम से जाना जाता है।


यह आम का बाग लगभग 600 एकड़ में फैला हुआ है और इसमें 1.5 लाख से अधिक फल देने वाले आम के पेड़ हैं। यहां आम की 200 से ज्यादा किस्में उगाई जाती हैं। गुजरात में 600 एकड़ का क्षेत्रफल लगभग 1,500 बीघा के बराबर होता है।


जामनगर में आम के बाग का स्थान


धीरूभाई अंबानी लखीबाग अमराई जामनगर में रिलायंस के बड़े रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स के आसपास विकसित किया गया है। इसकी स्थापना 1997 में पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से की गई थी।


इस परियोजना के लिए चुनी गई भूमि खारी और बंजर मानी जाती थी। रिलायंस ने इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पौधे लगाए और धीरे-धीरे यहां एक विशाल हरित क्षेत्र का निर्माण किया।


रिफाइनरी के चारों ओर हरित क्षेत्र का निर्माण


जामनगर रिफाइनरी के निर्माण के समय पर्यावरण से संबंधित कई चुनौतियाँ थीं। इसलिए, रिफाइनरी के चारों ओर हरित क्षेत्र विकसित करने की योजना बनाई गई।


इस पहल के तहत खारी भूमि पर पेड़ लगाए गए, और समय के साथ आम के पेड़ों की संख्या बढ़ती गई, जिससे यह परियोजना एक बड़े आम के बाग में परिवर्तित हो गई।


1.5 लाख से अधिक आम के पेड़


इस बाग की शुरुआत में लगभग 1 लाख आम के पेड़ लगाए गए थे। बाद में इसका विस्तार किया गया और अब यहां 1.5 लाख से अधिक फल देने वाले पेड़ हैं।


इस बाग की विशेषता केवल पेड़ों की संख्या नहीं है, बल्कि यहां आम की 200 से अधिक किस्मों का संग्रह भी है।


भारतीय और विदेशी आमों की विविधता


लखीबाग अमराई में कई प्रसिद्ध भारतीय आमों की किस्में उगाई जाती हैं, जैसे केसर, अल्फांसो, हापुस, लंगड़ा, चौसा, आम्रपाली और रत्ना।


अलग-अलग किस्मों को एक ही स्थान पर उगाने से इस बाग की विविधता में वृद्धि होती है।


विदेशी आमों की उपस्थिति


यह विशाल बाग केवल भारतीय आमों तक सीमित नहीं है। यहां कुछ विदेशी किस्मों की भी खेती की जाती है, जैसे अमेरिका की टॉमी एटकिंस और इजरायल की लिली और पामर।


इस प्रकार, जामनगर का यह बाग भारतीय और विदेशी आमों की कई किस्मों को एक ही परिसर में विकसित करने के लिए जाना जाता है।


धीरूभाई अंबानी के नाम पर नामकरण


इस बाग का नाम मुकेश अंबानी के पिता धीरूभाई अंबानी के सम्मान में रखा गया है। 'लखीबाग अमराई' नाम ऐतिहासिक लखीबाग से प्रेरित है, जो मुगल काल और अकबर से जुड़ा हुआ है।


ऐतिहासिक लखीबाग को भी आम के बड़े बाग के रूप में संदर्भित किया जाता है, जहां बड़ी संख्या में आम के पेड़ होते हैं।


पर्यावरण से शुरू हुआ प्रोजेक्ट, बड़ा कृषि एस्टेट बना


जामनगर की लखीबाग अमराई इस बात का उदाहरण है कि एक औद्योगिक क्षेत्र के आसपास शुरू की गई हरित पहल कैसे एक बड़े पैमाने की बागवानी परियोजना में बदल सकती है।


रिलायंस के अनुसार, यहां उत्पादित आमों को घरेलू बाजार के साथ-साथ अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी भेजा जाता है।


यह बाग अपने विशाल क्षेत्र, बड़ी संख्या में पेड़ों और आम की सैकड़ों किस्मों के कारण विशेष आकर्षण रखता है। हालांकि, जमीन को बीघा में बदलने का आंकड़ा स्थानीय माप प्रणाली के अनुसार भिन्न हो सकता है।