Newzfatafatlogo

बच्चों में डिजिटल लत: रील्स का दिमाग पर असर और समाधान

बच्चों में मोबाइल फोन के प्रति बढ़ती लत और शॉर्ट वीडियो के प्रभाव पर हालिया शोध ने चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि रील्स बच्चों के ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को कमजोर कर रही हैं। इस लेख में, हम जानेंगे कि कैसे ये वीडियो दिमाग पर असर डालते हैं और बच्चों को इस डिजिटल लत से बचाने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं। जानें कि माता-पिता को क्या करना चाहिए और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है।
 | 

क्या आपके बच्चे का ध्यान रील्स पर?


क्या आपका बच्चा मोबाइल फोन उठाते ही रील्स स्क्रॉल करने लगता है? यदि हाँ, तो यह केवल मनोरंजन का साधन नहीं है; यह एक ऐसी आदत बन सकती है जो उनके मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। हालिया शोध से यह स्पष्ट हुआ है कि इंस्टाग्राम रील्स, टिकटॉक और अन्य शॉर्ट-वीडियो प्लेटफार्म बच्चों की सोचने और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को प्रभावित कर रहे हैं। अध्ययन के अनुसार, शॉर्ट वीडियो की निरंतरता दिमाग के 'रिवॉर्ड सिस्टम' को सक्रिय रखती है, जिससे बच्चों के लिए पढ़ाई या किसी एक कार्य पर ध्यान केंद्रित करना कठिन हो जाता है। इस मुद्दे पर कई प्रमुख संस्थानों ने चिंता व्यक्त की है। यह सवाल उठता है: रील्स वास्तव में बच्चों के दिमाग में क्या परिवर्तन लाती हैं, और इन्हें कैसे नियंत्रित किया जा सकता है?


'शॉर्ट अटेंशन स्पैन' की परिभाषा

'शॉर्ट अटेंशन स्पैन' का अर्थ है किसी कार्य, किताब, अध्ययन या बातचीत पर लंबे समय तक ध्यान केंद्रित न कर पाना। माइक्रोसॉफ्ट की एक प्रसिद्ध स्टडी में पाया गया कि वर्ष 2000 में औसत ध्यान अवधि लगभग 12 सेकंड थी, लेकिन स्मार्टफोन और शॉर्ट वीडियो के प्रभाव में यह घटकर 8 सेकंड रह गई है। यह अवधि गोल्डफ़िश के औसत ध्यान अवधि (9 सेकंड) से भी कम है। विशेषज्ञों का कहना है कि 15 से 30 सेकंड के वीडियो देखने से दिमाग तेजी से सक्रिय होता है, जिससे स्कूल की कक्षाएं या लंबी बातचीत बच्चों को उबाऊ लगने लगती हैं।


रील्स देखने पर दिमाग की प्रतिक्रिया

चीन की झेजियांग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने न्यूरोइमेजिंग तकनीक का उपयोग करके शॉर्ट वीडियो के प्रभाव का अध्ययन किया। MRI स्कैन से पता चला कि रील्स और टिकटॉक वीडियो देखते समय दिमाग का 'वेंट्रल टेगमेंटल एरिया' सक्रिय हो जाता है, जो खुशी और पुरस्कार का अनुभव कराता है। नए वीडियो की निरंतरता से डोपामाइन का तेजी से स्राव होता है, जो बच्चों को बार-बार स्क्रीन पर जाने के लिए प्रेरित करता है। यह प्रक्रिया धीरे-धीरे एक आदत को लत में बदल सकती है और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को कमजोर कर सकती है।


'टिकटॉक ब्रेन' की अवधारणा

द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने इस स्थिति को 'टिकटॉक ब्रेन' कहा है, जो 'रील्स ब्रेन' पर भी लागू होता है। रिपोर्टों के अनुसार, प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स, जो निर्णय लेने और धैर्य रखने के लिए जिम्मेदार है, 25 वर्ष की आयु तक विकसित होता है। यदि कोई बच्चा इस महत्वपूर्ण विकास के दौरान शॉर्ट-फॉर्म वीडियो का आदी हो जाता है, तो उसकी ध्यान केंद्रित करने और आत्म-नियंत्रण की क्षमता कमजोर हो सकती है।


अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन की चेतावनी

अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन (APA) ने बच्चों और किशोरों के सोशल मीडिया उपयोग पर एक एडवाइजरी जारी की है। एसोसिएशन के अनुसार, जो बच्चे रोजाना दो घंटे या उससे अधिक समय तक शॉर्ट-फॉर्म वीडियो देखते हैं, उनमें कई व्यवहार संबंधी परिवर्तन देखे जा सकते हैं। इनमें चिड़चिड़ापन, पढ़ाई में रुचि की कमी, नींद में समस्या, बेचैनी और बार-बार मोबाइल चेक करने की इच्छा शामिल हैं।


बच्चों को डिजिटल लत से कैसे बचाएं?

बच्चों को डिजिटल लत से बचाने के लिए विशेषज्ञों ने तीन उपाय सुझाए हैं। पहला, 'स्क्रीन-फ्री टाइम' और 'नो-गैजेट ज़ोन' बनाना। दूसरा, बच्चों को असली जीवन की गतिविधियों में शामिल करना, जैसे आउटडोर खेल, संगीत, पेंटिंग या किताबें पढ़ना। तीसरा, माता-पिता को खुद उदाहरण पेश करना चाहिए, क्योंकि बच्चे अक्सर अपने माता-पिता की आदतों को अपनाते हैं।


डिजिटल डोपामाइन और इसकी आदत

शोध से पता चलता है कि जब कोई व्यक्ति नए और रोमांचक शॉर्ट वीडियो देखता है, तो दिमाग डोपामाइन रिलीज़ करता है, जिसे 'फील-गुड केमिकल' कहा जाता है। समस्या तब होती है जब दिमाग इस तुरंत मिलने वाली खुशी का आदी हो जाता है। नतीजतन, पढ़ाई, किताबें पढ़ना या सामान्य बातचीत बच्चों को आकर्षक नहीं लगतीं। यही कारण है कि बच्चे बार-बार नए वीडियो देखने के लिए अपने फोन का उपयोग करते हैं।


क्या करें?

विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीक अपने आप में समस्या नहीं है, बल्कि इसका अत्यधिक और अनियंत्रित उपयोग चिंता का कारण बन सकता है। इसलिए, बच्चों के स्क्रीन टाइम पर सीमा निर्धारित करना, उनकी उम्र के अनुसार सामग्री का चयन करना और परिवार के साथ ऑफलाइन गतिविधियों को बढ़ावा देना आवश्यक है।