रात की नींद की कमी से बढ़ सकता है मिनी-स्ट्रोक का खतरा
आज की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी और नींद की कमी
वर्तमान समय की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में, रातें अब पहले जैसी नहीं रहीं। आधी रात के बाद भी लोग अपने मोबाइल फोन की स्क्रीन पर व्यस्त रहते हैं, काम के ईमेल चेक करते हैं और सोशल मीडिया पर स्क्रॉल करते हैं, बिना यह सोचे कि कितना समय बीत गया है। यह एक सामान्य आदत बन चुकी है, खासकर युवा पेशेवरों के बीच। न्यूरोलॉजिस्टों का कहना है कि इस तरह की आदतें न केवल थकान का कारण बनती हैं, बल्कि मिनी-स्ट्रोक जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी बढ़ा सकती हैं।
मिनी-स्ट्रोक की परिभाषा
मिनी-स्ट्रोक, जिसे चिकित्सा भाषा में ट्रांज़िएंट इस्केमिक अटैक कहा जाता है, तब होता है जब मस्तिष्क के एक हिस्से में रक्त का प्रवाह कुछ समय के लिए रुक जाता है। इसके लक्षण कुछ ही मिनटों में कम हो सकते हैं, लेकिन इसे हल्के में लेना एक गंभीर गलती हो सकती है। यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ हेल्थ के अनुसार, ट्रांज़िएंट इस्केमिक अटैक का अनुभव करने वाले लगभग 33% व्यक्तियों को बाद में जीवन में स्ट्रोक का सामना करना पड़ सकता है, और इनमें से लगभग आधे मामले एक वर्ष के भीतर होते हैं।
नींद की कमी और स्वास्थ्य समस्याएं
डॉ. चंदना आर. गौड़ा ने बताया कि नींद की कमी न्यूरोलॉजिकल और हृदय संबंधी समस्याओं का एक प्रमुख कारण बनती जा रही है। उनका कहना है कि लंबे समय तक नींद की कमी से तनाव हार्मोन का स्तर बढ़ता है, रक्तचाप प्रभावित होता है, सूजन बढ़ती है और मेटाबॉलिज्म में रुकावट आती है। ये सभी कारक मिलकर मिनी-स्ट्रोक और उसके बाद होने वाले स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा सकते हैं।
अच्छी नींद का महत्व
विशेषज्ञों के अनुसार, अच्छी नींद केवल शरीर को आराम नहीं देती, बल्कि रक्त वाहिकाओं की मरम्मत, रक्तचाप को नियंत्रित करने और सूजन को कम करने में भी सहायक होती है। जब नींद की कमी होती है, तो शरीर के ये महत्वपूर्ण तंत्र प्रभावित होते हैं। नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट की रिसर्च से यह भी पता चला है कि लंबे समय तक नींद की कमी से उच्च रक्तचाप, मोटापा, मधुमेह और हृदय रोग का खतरा बढ़ता है, जो स्ट्रोक के मुख्य कारण माने जाते हैं।
डिलेड ग्रैटिफिकेशन की अवधारणा
हाल के वर्षों में, 'डिलेड ग्रैटिफिकेशन' का एक नया शब्द प्रचलित हुआ है। इसका अर्थ है दिनभर काम करने के बाद, जब शरीर को आराम की आवश्यकता होती है, तब जानबूझकर देर तक जागना। डॉ. गौड़ा के अनुसार, देर रात तक फोन का उपयोग करना, लगातार स्क्रीन पर देखना और केवल कुछ घंटों की नींद लेना आजकल कई युवाओं की आदत बन गई है, जिससे भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
मिनी-स्ट्रोक के लक्षण
मिनी-स्ट्रोक के साथ सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके लक्षण अक्सर अनदेखे रह जाते हैं। शरीर के किसी एक हिस्से में अचानक कमजोरी या सुन्नपन, बोलने में कठिनाई, चक्कर आना, धुंधला दिखना, चेहरे का एक तरफ झुक जाना या कुछ मिनटों के लिए भ्रमित होना इसके प्रारंभिक लक्षण हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे किसी भी लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
