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साइबर ठगी का नया तरीका: फेस और वॉइस क्लोनिंग से रहें सतर्क

साइबर अपराधी अब फेस और वॉइस क्लोनिंग के जरिए ठगी कर रहे हैं। इस नए स्कैम में ठग पहले किसी व्यक्ति का चेहरा और आवाज रिकॉर्ड करते हैं। हैदराबाद की साइबर क्राइम पुलिस ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। जानें कैसे आप इस खतरे से बच सकते हैं और क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।
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साइबर अपराधियों का नया स्कैम


साइबर अपराधी लोगों को धोखा देने के लिए लगातार नए तरीके खोज रहे हैं। हाल ही में एक नया स्कैम सामने आया है, जिसमें ठग पहले किसी व्यक्ति का चेहरा और आवाज रिकॉर्ड करते हैं और फिर उसी का उपयोग करके ठगी करते हैं। इस विधि को 'फेस-वॉइस क्लोनिंग स्कैम' कहा जा रहा है।



हैदराबाद की साइबर क्राइम पुलिस ने इस नए स्कैम के बारे में लोगों को चेतावनी दी है। पुलिस के अनुसार, ठग अक्सर भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर लोगों से मोबाइल फोन से संबंधित छोटी मदद मांगते हैं। वे खुद को तकनीकी ज्ञान न रखने वाला व्यक्ति बताकर सामने वाले को बिना शक किए मदद करने के लिए प्रेरित करते हैं।


ठग का मोबाइल पहले से ही वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग मोड पर होता है। जब कोई व्यक्ति मदद के लिए फोन उठाता है, तो कुछ ही सेकंड में उसका चेहरा और आवाज रिकॉर्ड हो जाती है। इसके बाद, साइबर अपराधी इस रिकॉर्डिंग का उपयोग एआई (AI) तकनीक के माध्यम से फर्जी पहचान बनाने, वॉइस क्लोनिंग करने और ऑनलाइन ठगी करने के लिए करते हैं।


इस बढ़ते खतरे को देखते हुए इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। एजेंसी ने कहा है कि अनजान लोगों के मोबाइल का उपयोग करने या उनके कहने पर कैमरे के सामने आने से बचें।


बचाव के उपाय

ऐसे करें बचाव



  • किसी अनजान व्यक्ति का मोबाइल लेने से पहले सावधानी बरतें।

  • यदि किसी वीडियो रिकॉर्डिंग या कैमरा ऑन होने का संदेह हो, तो मदद करने से पहले जांच करें।

  • अपनी आवाज और चेहरे की रिकॉर्डिंग अनजान लोगों के साथ साझा करने से बचें।

  • किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर दें।


विशेषज्ञों का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में फेस और वॉइस क्लोनिंग का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। थोड़ी-सी सतर्कता आपको बड़ी साइबर ठगी से बचा सकती है।