कांच की इमारतें: प्रवासी पक्षियों के लिए खतरा और समाधान
प्रवासी पक्षियों के लिए कांच की इमारतों का खतरा
नई दिल्ली: आधुनिक शहरीकरण में ऊंची कांच की इमारतें विकास का प्रतीक मानी जाती हैं, लेकिन ये प्रवासी पक्षियों के लिए गंभीर खतरा बन गई हैं। पक्षी पारदर्शी और परावर्तक कांच को खुला रास्ता समझते हैं और तेजी से टकरा जाते हैं।
समस्या का सरल समाधान
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का समाधान आसान है। कांच पर विशेष पैटर्न या छोटे बिंदु बनाकर लाखों पक्षियों की जान बचाई जा सकती है और जैव विविधता की रक्षा की जा सकती है।
कांच की इमारतों का खतरा
हर साल करोड़ों पक्षी लंबी दूरी की यात्रा के दौरान शहरों के ऊपर से गुजरते हैं। पारदर्शी या चमकदार कांच में आसमान, पेड़ और बादलों का प्रतिबिंब दिखाई देता है, जिससे पक्षी इसे खुला रास्ता समझकर उड़ान जारी रखते हैं और कांच से टकरा जाते हैं। कनाडा में हर साल 1.6 करोड़ से 4.2 करोड़ पक्षियों की मौत इस कारण होती है।
छोटे पैटर्न का बड़ा प्रभाव
वैज्ञानिकों का कहना है कि कांच पर छोटे-छोटे डॉट्स या पैटर्न बनाना एक प्रभावी उपाय है। यदि इन पैटर्नों के बीच की दूरी पांच सेंटीमीटर से कम रखी जाए, तो पक्षी कांच को बाधा के रूप में पहचान लेते हैं। कनाडाई शोध में पाया गया कि इस तकनीक से टकराने की घटनाओं में 95 प्रतिशत तक कमी आई है।
हर इमारत में लागू किया जा सकता है उपाय
विशेषज्ञों के अनुसार, इसके लिए पूरी खिड़की बदलने की आवश्यकता नहीं है। डिकल्स, विशेष फिल्म, पेंट, मार्कर या बर्ड-सेफ ग्लास के माध्यम से कांच को पक्षियों के लिए सुरक्षित बनाया जा सकता है। यह तकनीक नई और पुरानी दोनों तरह की इमारतों में अपनाई जा सकती है, जिससे निर्माण लागत भी सीमित रहती है।
सिर्फ ऊंची इमारतें नहीं हैं जिम्मेदार
रिसर्च बताती है कि केवल गगनचुंबी इमारतें ही खतरा नहीं हैं। घरों, कार्यालयों, बस स्टॉप, रेलिंग और कम ऊंचाई वाली इमारतों में भी बड़ी संख्या में पक्षी टकराते हैं। इनके आसपास पेड़-पौधे होने के कारण पक्षियों की आवाजाही अधिक रहती है। ऐसे स्थानों पर कांच का प्रतिबिंब दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ा देता है।
दुनिया की बदलती सोच
न्यूयॉर्क, वाशिंगटन और टोरंटो जैसे शहर पक्षी-अनुकूल निर्माण को बढ़ावा देने वाली नीतियां लागू कर रहे हैं। संरक्षण संगठनों का मानना है कि भवन निर्माण के शुरुआती चरण में ही सुरक्षित डिजाइन अपनाना अधिक किफायती और प्रभावी है। 2019 में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, 1970 से 2019 के बीच उत्तरी अमेरिका में लगभग तीन अरब पक्षियों की संख्या घट चुकी है। ऐसे में बर्ड-सेफ ग्लास जैसी पहलें संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं।
