नवरात्रि 2026: रंग-बिरंगे कपड़ों के साथ मनाएं इस त्योहार की खासियत
नवरात्रि का जश्न
नई दिल्ली: नवरात्रि का नाम सुनते ही मन में रंगीन कपड़े, सजावट और गरबा की धुन गूंजने लगती है। इस पर्व की एक महत्वपूर्ण परंपरा है कि हर दिन एक विशेष रंग पहनना होता है। शारदीय नवरात्रि 2026 का आरंभ 11 अक्टूबर से हो रहा है और यह 19 अक्टूबर तक चलेगा। इसके बाद, 20 अक्टूबर को विजयादशमी या दशहरा मनाया जाएगा। इस दौरान मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है, जिन्हें नवदुर्गा कहा जाता है। हर रूप के साथ एक रंग जुड़ा होता है, जो उनके गुणों का प्रतीक है। इस वर्ष रंगों का क्रम इस प्रकार है: नारंगी, सफेद, लाल, गहरा नीला, पीला, हरा, ग्रे, बैंगनी और मोरपंखी हरा। विभिन्न क्षेत्रों में रंगों की सूची में थोड़ा भिन्नता हो सकती है, इसलिए इसे एक सामान्य मार्गदर्शन के रूप में देखें।
पहले तीन दिन: नारंगी, सफेद और लाल
पहले दिन, 11 अक्टूबर को नारंगी रंग का महत्व है, जो ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक है। यह दिन मां शैलपुत्री को समर्पित है, जो बैल पर सवार होती हैं और त्रिशूल व कमल धारण करती हैं। इस दिन घरों में कलश स्थापित किया जाता है। नारंगी रंग उत्साह और साहस का प्रतीक माना जाता है।
दूसरे दिन, 12 अक्टूबर को सफेद रंग पहना जाता है, जो शांति और सादगी का प्रतीक है। यह दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है, जो तप और संयम का प्रतीक हैं। भक्त इस दिन सूती या साधारण पारंपरिक कपड़े पहनते हैं।
तीसरे दिन, 13 अक्टूबर को लाल रंग का महत्व है, जो शक्ति और उत्साह का प्रतीक है। यह दिन मां चंद्रघंटा का है, जो शेर पर सवार योद्धा रूप में दिखाई देती हैं। लाल रंग उत्सव का प्रतीक है, जिससे माहौल खास बनता है।
चौथे से छठे दिन: नीला, पीला और हरा
चौथे दिन, 14 अक्टूबर को गहरे नीले रंग का महत्व है, जो गहराई और स्थिरता का प्रतीक है। इस दिन मां कूष्मांडा की पूजा होती है, जिन्होंने हल्की मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। नीला रंग मन को शांति और स्थिरता प्रदान करता है।
पांचवें दिन, 15 अक्टूबर को पीला रंग पहनना होता है, जो खुशी और आशा का प्रतीक है। यह दिन मां स्कंदमाता का है, जो अपने पुत्र कार्तिकेय को गोद में लिए होती हैं। इस दिन गेंदे की मालाओं और पीले परिधानों से रौनक रहती है।
छठे दिन, 16 अक्टूबर को हरे रंग का महत्व है, जो विकास और संतुलन का प्रतीक है। इस दिन मां कात्यायनी की पूजा होती है, जिन्होंने महिषासुर का वध किया था। हरा रंग नई शुरुआत का प्रतीक है।
सातवें से नौवें दिन: ग्रे, बैंगनी और मोरपंखी हरा
सातवें दिन, 17 अक्टूबर को ग्रे रंग का महत्व है, जो संतुलन और संयम का प्रतीक है। यह दिन मां कालरात्रि का है, जो दुर्गा का सबसे भयानक रूप मानी जाती हैं। लोग इस दिन ग्रे के साथ चटक दुपट्टा या गहने पहनकर अपने लुक को निखारते हैं।
आठवें दिन, 18 अक्टूबर को बैंगनी रंग पहना जाता है, जो समझदारी और गरिमा का प्रतीक है। इस दिन मां महागौरी की पूजा होती है, जो भक्तों के पाप धो देती हैं।
नौवें और अंतिम दिन, 19 अक्टूबर को मोरपंखी हरा रंग पहनना होता है, जो करुणा और पूर्णता का प्रतीक है। यह दिन मां सिद्धिदात्री का है, जो सच्चे मन से पूजा करने वालों को ज्ञान और सिद्धियां देती हैं।
रंगों का महत्व और अपनाने के तरीके
ये नौ रंग कोई कठोर धार्मिक नियम नहीं हैं, और हर परिवार या क्षेत्र की परंपरा भिन्न हो सकती है। ये रंग हर दिन देवी से जुड़ने और त्योहार की खुशी साझा करने का एक सरल तरीका हैं। इसके लिए नए कपड़े खरीदना आवश्यक नहीं है; दुपट्टा, बिंदी, चूड़ियां या एक छोटा फूल भी उस दिन का रंग दर्शा सकता है। असली महत्व पूजा, परिवार के साथ बिताए गए समय और नई शुरुआत की भावना में है।
