भुवनेश्वर की यात्रा: 5 अद्भुत स्थान जो आपको जरूर देखने चाहिए
भुवनेश्वर: एक अद्भुत यात्रा का प्रारंभ
भुवनेश्वर: यदि आप पुरी की रथयात्रा या जगन्नाथ दर्शन के लिए जा रहे हैं, तो भुवनेश्वर को केवल एक रास्ता न समझें। उड़ीसा की राजधानी को 'टेंपल सिटी' के नाम से जाना जाता है, और यहां एक दिन में भी आप शहर की आत्मा को महसूस कर सकते हैं। भुवनेश्वर और इसके आस-पास 23 से अधिक दर्शनीय स्थल हैं, लेकिन यदि आपके पास समय कम है, तो ये 5 स्थान आपकी यात्रा की सूची में अवश्य शामिल होने चाहिए।
लिंगराज मंदिर - शहर का प्राचीन शिव मंदिर
लिंगराज मंदिर भुवनेश्वर की पहचान है। यह 11वीं शताब्दी में स्थापित भगवान शिव को समर्पित है और शहर का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर भी है। यह मंदिर पुराने शहर में स्थित है, जो एयरपोर्ट से केवल 4.5 किमी और रेलवे स्टेशन से 5 किमी की दूरी पर है।
समय: सुबह 6:30 से रात 7:30 बजे तक
बिंदू सरोवर - शिव और पार्वती की पवित्रता
लिंगराज मंदिर के निकट स्थित बिंदू सरोवर को भगवान शिव ने माता पार्वती की प्यास बुझाने के लिए बनवाया था। यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है, जहां लोग स्नान करते हैं।
समय: सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक
धौलीगिरी शांति स्तूप - शांति और इतिहास का संगम
धौलीगिरी स्तूप, जहां कलिंग युद्ध के बाद अशोक ने बौद्ध धर्म अपनाया, एक अद्भुत स्थल है। इसे पीस पैगोडा भी कहा जाता है। सफेद स्तूप और चारों ओर हरियाली मन को सुकून देती है। यहां शाम को लाइट एंड साउंड शो का आयोजन होता है, जो अवश्य देखना चाहिए।
एंट्री फीस: 50 रुपये समय: सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तक
राजारानी मंदिर - अद्वितीय वास्तुकला
11वीं सदी का राजारानी मंदिर भी भगवान शिव को समर्पित है। इसका नाम यहां के विशेष पीले और लाल पत्थरों के कारण पड़ा है। कलिंग शैली की नक्काशी और मूर्तियां देखने लायक हैं।
एंट्री फीस: भारतीय 25 रुपये, विदेशी 250 रुपये
मुक्तेश्वर मंदिर - वास्तुकला का अनूठा उदाहरण
यह छोटा लेकिन बेहद खूबसूरत मंदिर लाल बलुआ पत्थर से बना है। इसका तोरण द्वार और चौकोर बिल्डिंग इसे खास बनाते हैं। यहां फोटोग्राफी के लिए बेहतरीन एंगल मिलते हैं।
एंट्री: फ्री
अन्य दर्शनीय स्थल
यदि आपके पास और समय है, तो आप नंदनकानन जू, निक्को पार्क, उड़ीसा स्टेट म्यूजियम या परशुरामेश्वर मंदिर भी देख सकते हैं। एक दिन में भुवनेश्वर आपको इतिहास, आस्था और कला का अद्भुत अनुभव देगा। पुरी से केवल 60 किमी दूर होने के कारण इसे अपनी यात्रा में अवश्य शामिल करें।
