मानसून में गीले जूतों से होने वाले संक्रमण से बचने के उपाय
मानसून में गीले जूतों का खतरा
नई दिल्ली: मानसून के दौरान अचानक बारिश के कारण कई लोग लंबे समय तक गीले जूते पहनने को मजबूर होते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदत पैरों के लिए हानिकारक हो सकती है। लगातार नमी के संपर्क में रहने से फंगस और बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब पैर लंबे समय तक गीले रहते हैं, तो त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत कमजोर हो जाती है। नमी, गर्मी और हवा की कमी फंगस और बैक्टीरिया के विकास के लिए अनुकूल वातावरण बनाती है। यही कारण है कि मानसून में पैरों से संबंधित संक्रमण के मामले बढ़ जाते हैं। यदि जूते ठीक से न सुखाए जाएं, मोजे नियमित रूप से न बदले जाएं या पैरों की सफाई न की जाए, तो संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ सकता है।
संक्रमण के लक्षण
बारिश के मौसम में सबसे आम समस्या एथलीट फुट होती है, जिसे टिनिया पीडिस भी कहा जाता है। इसमें पैरों की उंगलियों के बीच खुजली, जलन, सफेद परत और त्वचा का छिलना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यदि समय पर उपचार नहीं किया गया, तो यह संक्रमण पूरे तलवे और नाखूनों तक फैल सकता है।
लगातार गीले जूतों के कारण नाखूनों में फंगल संक्रमण भी हो सकता है। इस स्थिति में नाखून पीले, मोटे और कमजोर हो जाते हैं, और आसानी से टूटने लगते हैं। यदि संक्रमण गंभीर हो जाए, तो उपचार में काफी समय लग सकता है।
चेतावनी के संकेत
उंगलियों के बीच लगातार नमी रहने से इंटरडिजिटल फंगल संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। इसमें त्वचा गलने लगती है, दर्द होता है और चलने में कठिनाई हो सकती है। इसके अलावा, यदि त्वचा में कट या दरार हो, तो बैक्टीरिया प्रवेश कर सकते हैं, जिससे सेल्युलाइटिस जैसी गंभीर समस्या हो सकती है। इस संक्रमण में पैर लाल, सूजा हुआ, गर्म और दर्दनाक हो सकता है। यदि बुखार भी हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
गीले जूतों के कारण इम्पेटिगो नामक बैक्टीरियल त्वचा संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है। इसमें त्वचा पर छोटे फफोले बनते हैं, जो बाद में पीली पपड़ी में बदल जाते हैं और यह संक्रमण दूसरों में भी फैल सकता है।
विशेषज्ञों की सलाह
विशेषज्ञों का सुझाव है कि बारिश में घर लौटने के बाद तुरंत गीले जूते और मोजे बदलें। पैरों को अच्छी तरह धोकर पूरी तरह सुखाएं। कॉटन या नमी सोखने वाले मोजे पहनें, जूतों को दोबारा पहनने से पहले अच्छी तरह सूखने दें और आवश्यकता पड़ने पर एंटीफंगल पाउडर का उपयोग करें। यदि खुजली, बदबू, लालिमा, सूजन या त्वचा छिलने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें नजरअंदाज न करें और चिकित्सकीय सलाह लें।
