Newzfatafatlogo

उत्तर प्रदेश में विधायक निधि का खर्च: आंकड़े और वास्तविकता

उत्तर प्रदेश में विधायक निधि के खर्च की स्थिति पर एक विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। इस लेख में बताया गया है कि कैसे कई विधायक अपनी निधि का सही उपयोग नहीं कर पाए हैं, जबकि कुछ विधायक अपने निधि का अधिकतम उपयोग कर रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार वर्षों में कई विधायकों ने अपनी निधि से एक भी रुपये खर्च नहीं किए हैं। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा जा रहा है और कौन से विधायक सक्रिय हैं।
 | 

विधायक निधि का महत्व

भारत के सांसदों और अधिकांश राज्यों के विधायकों को अपने निर्वाचन क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए एक निश्चित राशि दी जाती है, जिसे सांसद या विधायक निधि कहा जाता है। उत्तर प्रदेश में, लोकसभा सांसदों के समान, विधायकों को 5 करोड़ रुपये की निधि मिलती है। हालांकि, यह राशि विकास कार्यों के लिए अक्सर अपर्याप्त साबित होती है। पिछले चार वर्षों में कई विधायक ऐसे रहे हैं जिन्होंने अपनी निधि का पूरा उपयोग नहीं किया। कुछ विधायकों की निधि में से तो दो से तीन साल तक एक भी रुपये खर्च नहीं हुए। अधिकारियों का कहना है कि काम हुए हैं, लेकिन पोर्टल पर डेटा अपडेट नहीं हो पाया है।


विधायकों की निधि का आंकड़ा

उत्तर प्रदेश में 403 विधायकों की संख्या के कारण हर साल कम से कम 2015 करोड़ रुपये आवंटित होते हैं। कभी-कभी पिछले साल की बची हुई राशि भी इसमें जोड़ दी जाती है, जिससे यह राशि और बढ़ जाती है। वर्ष 2024-25 में कुल 2338 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। हालांकि, खर्च का अनुपात कम दिखता है क्योंकि आधे से अधिक कार्य पूरे नहीं हो पाते। पिछले चार वर्षों में कुल 8042 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, लेकिन इनमें से केवल 78 प्रतिशत राशि का ही काम स्वीकृत हो पाया है।


विधायकों की निधि का इतिहास

विधायक निधि का इतिहास 1998-99 में 50 लाख रुपये से शुरू हुआ था, जो पिछले 25 वर्षों में 10 गुना बढ़कर 5 करोड़ रुपये हो गया है। 2000-2001 में इसे 75 लाख, 2012-13 में 1.5 करोड़, 2018-19 में 2 करोड़ (GST के लिए 40 लाख अतिरिक्त), 2020-21 में 3 करोड़ और 2023-24 में 5 करोड़ रुपये कर दिया गया।


खर्च न होने का कारण

MLALADS पोर्टल के अनुसार, 6 विधायकों ने पिछले दो या तीन वर्षों में अपनी निधि से एक भी रुपये खर्च नहीं किए। इनमें से पांच विधायक सत्ताधारी गठबंधन से हैं, जिनमें चार भारतीय जनता पार्टी से हैं। इनमें उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री दयाशंकर सिंह का नाम भी शामिल है। अन्य विधायकों में अनिल कुमार सिंह, मयंकेश्वर शरण सिंह और राकेश गोस्वामी शामिल हैं।


मुख्यमंत्रियों और बड़े नेताओं का प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2023-24 में 3.79 करोड़, 2024-25 में 5.70 करोड़ और 2025-26 में 2.90 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने भी इसी तरह के खर्च किए हैं। वहीं, नेता विपक्ष माता प्रसाद पांडे ने अपने निधि से अधिक खर्च किया है।


विधायकों द्वारा किए गए कार्य

विधायकों द्वारा किए गए कार्यों में सड़क के किनारे लाइट लगवाना, इंटरलॉकिंग रोड बनवाना, पीने के पानी का इंतजाम करना शामिल है। कुछ विधायकों ने असाध्य रोगों से पीड़ित लोगों की आर्थिक सहायता, सोलर लाइट और सीवर के काम पर भी निधि खर्च की है।


विधायकों की निधि का सही उपयोग

जहां कुछ विधायक अपनी निधि का सही उपयोग नहीं कर पाए हैं, वहीं कुछ विधायक अपने निधि का अधिकतम उपयोग कर रहे हैं। बस्ती जिले के विधायक कवींद्र चौधरी ने 20 करोड़ की निधि में से 17.89 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।


पोर्टल की स्थिति

MLALDASUP डॉट इन वेबसाइट 15 मार्च 2024 को शुरू की गई थी, जिसके कारण 2023-24 के बाद का डेटा उपलब्ध है। हालांकि, कई विधायकों के कार्यों का ब्योरा कई वर्षों से अपडेट नहीं हुआ है।