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दिल्ली मेट्रो और नीट परीक्षा पेपर लीक पर विवाद: क्या सच है?

दिल्ली मेट्रो की सेवा और नीट परीक्षा के पेपर लीक पर चल रहे विवादों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या सच में मेट्रो बंद थी? क्या एनटीए ने पेपर लीक की घटनाओं को छुपाया है? इस लेख में हम इन मुद्दों की गहराई में जाकर सच्चाई का पर्दाफाश करेंगे। जानें, क्या सरकार के दावे सही हैं या नहीं।
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दिल्ली मेट्रो की सेवा पर सवाल


क्या 10 अक्टूबर को दिल्ली में मेट्रो सेवा बंद थी? क्या नीट परीक्षा के पेपर लीक नहीं हुए थे? यदि आप दिल्ली या एनसीआर में किसी से पूछें, तो वह यही बताएगा कि मेट्रो बंद थी और पेपर लीक हुए हैं। हर व्यक्ति निजी अनुभव से जानता है कि मेट्रो की सेवा प्रभावित हुई थी। इंटरनेट सेवा के संदर्भ में, एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट ने 15 अक्टूबर को बताया कि भारत इंटरनेट बंद होने के मामले में दूसरे स्थान पर है, पहले स्थान पर म्यांमार है। इसलिए, यह स्पष्ट है कि मेट्रो और इंटरनेट दोनों ही बंद थे।


दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन का हलफनामा

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा पेश करते हुए कहा है कि मेट्रो सेवा पूरी तरह से बंद नहीं थी। उनका कहना है कि केवल 45 मेट्रो स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट बंद किया गया था। इसका मतलब यह है कि मेट्रो की सेवा सीमित की गई थी। सोचिए, यह कितना आसान है सरकार के लिए यह कहना! यदि इन 45 स्टेशनों पर लोग ट्रेन पकड़ने या उतरने नहीं जा सकते थे, तो क्या यह सेवा बंद नहीं हुई? लाखों लोगों के लिए मेट्रो की सेवा वास्तव में बंद थी।


नेशनल टेस्टिंग एजेंसी का दावा

एक रिपोर्ट में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने कहा है कि 2017 में इसके गठन के बाद से कोई पेपर लीक नहीं हुआ है। यह दावा पूरी तरह से गलत है। कांग्रेस सांसद मुकुल वासनिक की अध्यक्षता वाली समिति के सामने एनटीए ने कहा कि कुछ अनियमितताओं की शिकायतें आई हैं, लेकिन पेपर लीक नहीं हुआ। सवाल यह है कि 3 मई 2026 को नीट परीक्षा को क्यों रद्द किया गया? 7 मई को पेपर लीक की खबर आई और 12 मई को परीक्षा रद्द की गई। एनटीए और शिक्षा मंत्रालय ने बार-बार कहा है कि पेपर लीक के कारण परीक्षा रद्द हुई।