पश्चिम एशिया संकट: नेतन्याहू का ईरान पर कड़ा रुख
ईरान के परमाणु हथियारों पर नेतन्याहू की चेतावनी
लेबनान में हिजबुल्ला पर दबाव बनाए रखने का संकल्प
पश्चिम एशिया संकट अपडेट: तेल अवीव में, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के बावजूद, क्षेत्र में शांति की कोई संभावना नहीं दिख रही है। हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का पहला दौर तनावपूर्ण स्थिति में समाप्त हुआ। इस बीच, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के लेबनान और हिजबुल्ला पर हमले रोकने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया।
नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि उनका देश ईरान को परमाणु हथियार प्राप्त करने से रोकने के लिए प्रतिबद्ध है और दक्षिण लेबनान में हिजबुल्ला पर सैन्य दबाव बनाए रखेगा। उन्होंने अपनी सरकार की पिछले एक वर्ष की सैन्य रणनीति का बचाव करते हुए कहा कि ईरान के खतरे को समाप्त करने के लिए यह अभियान आवश्यक था। नेतन्याहू ने चेतावनी दी कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं की गई, तो ईरान पहले ही परमाणु हथियार हासिल कर सकता था।
हिजबुल्ला की प्रतिक्रिया
इस बीच, बेरूत ने इजराइल के इस रुख का विरोध किया है। हिजबुल्ला के नेता नईम कासिम ने कहा कि इजराइल को लेबनान में किसी भी प्रकार की मौजूदगी की अनुमति नहीं दी जाएगी और संघर्ष विराम के उल्लंघन पर जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी।
ट्रंप की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का प्रयास किया, तो अमेरिका उसे पूरी तरह से नष्ट कर देगा। ट्रंप ने कहा कि ऐसी स्थिति में ईरानी प्रतिनिधिमंडल अपने देश वापस नहीं लौट पाएगा।
उन्होंने एक नया प्रस्ताव पेश किया, जिसमें कहा गया कि वहां से गुजरने वाले तेल के जहाजों से 20 प्रतिशत टोल के रूप में वसूला जा सकता है। ट्रंप का तर्क है कि अमेरिका ने इस क्षेत्र की सुरक्षा पर अरबों डॉलर खर्च किए हैं, इसलिए उसे यह राशि वापस मिलनी चाहिए। उन्होंने अमेरिकी सेना को इस क्षेत्र का 'गार्जियन एंजल' बताते हुए सुरक्षा के बदले भुगतान की आवश्यकता पर जोर दिया।
