Newzfatafatlogo

सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर दवाओं की कीमतों को 'दिनदहाड़े डकैती' करार दिया

सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर दवाओं की exorbitant कीमतों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, इसे 'दिनदहाड़े डकैती' करार दिया। अदालत ने दवा कंपनियों और रिटेलरों द्वारा मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाने पर गहरी नाराजगी जताई। इसके अलावा, आयुष्मान भारत योजना के तहत फर्जीवाड़े की चिंता भी व्यक्त की गई। अदालत ने डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है जो सस्ती जेनेरिक दवाएं नहीं लिखते। इस मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।
 | 

कैंसर दवाओं की बढ़ती कीमतों पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

नई दिल्ली: जीवनरक्षक कैंसर दवाओं की बढ़ती कीमतों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने इसे सीधे तौर पर 'दिनदहाड़े डकैती' बताते हुए गहरी नाराजगी व्यक्त की और सवाल उठाया कि इस खुली लूट पर रोक लगाने के लिए जिम्मेदार सरकारी एजेंसियां अब तक चुप क्यों हैं। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने दवाओं के मूल्य नियंत्रण से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान कहा कि मरीजों की मजबूरी का इस तरह फायदा उठाना बेहद चौंकाने वाला और अस्वीकार्य है।


10 गुना अधिक कीमत पर बिक रही दवाएं
पीठ ने एक गंभीर उदाहरण पेश करते हुए कहा कि जिस कैंसर दवा का 'प्राइस टू रिटेलर' (PTR) केवल 2,700 रुपये है, उस पर 27,000 रुपये का एमआरपी छापा जा रहा है। अदालत ने कहा, "रिटेलर को मिलने वाले दाम से 10 गुना अधिक एमआरपी रखना अगर जबरन वसूली नहीं है, तो फिर क्या है? लोग कैंसर के इलाज के लिए अपने घर, जमीन और गहने तक बेच देते हैं। यह मरीजों के साथ सरासर डकैती है।" अदालत ने यह भी हैरानी जताई कि जिन नियामक संस्थाओं को इस पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए थी, वे मौन हैं।


आयुष्मान भारत योजना में फर्जीवाड़ा
सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में इसके दुरुपयोग पर भी चिंता जताई। पीठ ने कहा कि जब मरीज 'आयुष्मान भारत' जैसी योजनाओं के तहत इलाज कराते हैं, तो अस्पताल इन दवाओं को अत्यधिक दरों पर दिखाकर सरकार से पूरा क्लेम प्राप्त करते हैं। अदालत ने कहा कि यह पूरी कीमत देश के आम करदाताओं की मेहनत की कमाई से वसूली जाती है। यह सीधे तौर पर एक सुनियोजित वित्तीय धोखाधड़ी का मामला बनता है, जिस पर तुरंत कड़ा अंकुश लगाने की आवश्यकता है।


डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग
अदालत में दायर याचिकाओं में मांग की गई है कि दवा कंपनियों और रिटेलरों द्वारा गैर-कानूनी तरीके से भारी मुनाफा कमाने पर रोक लगाई जाए और ड्रग्स (प्राइसेज कंट्रोल) ऑर्डर, 2013 को सख्ती से लागू किया जाए। इसके साथ ही, एक अन्य याचिका में उन डॉक्टरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की गई है जो मरीजों को सस्ती जेनेरिक दवाएं न लिखकर जानबूझकर महंगी ब्रांडेड दवाएं लिखते हैं। केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने अदालत को बताया कि सरकार इस मामले को सकारात्मक दृष्टिकोण से देख रही है। सुप्रीम कोर्ट ने दवाओं के मूल्य निर्धारण को अत्यंत संवेदनशील और गंभीर विषय मानते हुए मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर तय की है।