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102 वर्षीय दादी की कांवड़ यात्रा: पोते ने किया अद्भुत कार्य

सावन के महीने में यमुनानगर में एक अनोखी कांवड़ यात्रा ने सभी का ध्यान खींचा। 102 वर्षीय सुनहरी देवी को उनके पोते और दोहते ने हरिद्वार की तीर्थ यात्रा पर ले जाने का निर्णय लिया। इस यात्रा ने न केवल परिवार के संस्कारों को उजागर किया, बल्कि बुजुर्गों के प्रति सम्मान और सेवा की भावना को भी दर्शाया। जानें इस यात्रा की भावनात्मक कहानी और कैसे यह सभी के लिए प्रेरणा बनी।
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कांवड़ यात्रा 2026: एक अनोखी श्रद्धा


सावन के महीने में लाखों शिवभक्त कांवड़ लेकर निकलते हैं, इसी दौरान यमुनानगर में एक विशेष कांवड़ यात्रा ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। इस यात्रा में 102 वर्षीय सुनहरी देवी पालकी में विराजमान थीं, जिन्हें उनके पोते और दोहते ने अपने कंधों पर बैठाकर हरिद्वार की यात्रा कराई।


हर की पौड़ी से गंगाजल लेकर, दोनों युवक अब पंजाब के पटियाला लौट रहे हैं। इस यात्रा की लंबाई लगभग 300 किलोमीटर है, और उनके समर्पण ने सभी को भावुक कर दिया।


दादी का अनुभव: संस्कारों की महत्ता

सुनहरी देवी ने इस यात्रा को अपने जीवन का सबसे खास अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि इस उम्र में उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनके पोते और दोहते उन्हें इस तरह तीर्थ दर्शन कराएंगे।


उन्होंने अपने परिवार के संस्कारों पर गर्व जताते हुए कहा कि भगवान हर घर में ऐसे बच्चे दें, जो अपने बुजुर्गों का सम्मान और सेवा करें। उनके अनुसार, यह यात्रा उनके जीवन की यादगार घटनाओं में से एक रहेगी।


पिता की इच्छा को पूरा करने का संकल्प

पटियाला के निवासी पोते सिमरन ने बताया कि उनके पिता की हमेशा से इच्छा थी कि उनकी मां को तीर्थ यात्रा कराई जाए, जैसे श्रवण कुमार ने अपने माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर यात्रा कराई थी।


इसी इच्छा को पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी 102 वर्षीय दादी को पालकी में बैठाकर हरिद्वार ले जाने का निर्णय लिया। हर की पौड़ी पर स्नान और दर्शन के बाद, वे गंगाजल लेकर अपने घर की ओर बढ़ रहे हैं।


17 वर्षीय पोते की जिम्मेदारी

इस यात्रा में सिमरन के साथ उनका 17 वर्षीय दोहता विराट भी शामिल हुआ। विराट ने कहा कि जब उसे परिवार की इस इच्छा के बारे में पता चला, तो उसने तुरंत इस सेवा यात्रा में शामिल होने का निर्णय लिया।


विराट ने कहा कि अपनी नानी को तीर्थ यात्रा करवाने का मौका उसके लिए सौभाग्य की बात है। इस यात्रा में उसकी मां भी उनके साथ हैं।


102 वर्षीय बुजुर्ग की सुविधा के लिए एक मजबूत और आरामदायक पालकी तैयार की गई थी। दोनों युवकों ने बताया कि रास्ते में समय-समय पर विश्राम किया जाता है, ताकि बुजुर्ग को कोई परेशानी न हो। जब ये अनोखी कांवड़ यात्रा विभिन्न स्थानों से गुजरी, तो लोगों की नजरें इस पर ठहर गईं। कई श्रद्धालुओं ने रुककर दोनों युवकों का उत्साह बढ़ाया और बुजुर्ग महिला से आशीर्वाद लिया।