21 वर्षीय छात्र ने नदी की सफाई से बदली तस्वीर, बना प्रेरणा का स्रोत
ब्यावरा में नदी की सफाई की अनोखी कहानी
ब्यावरा - एक समय था जब लोग गंदगी और दुर्गंध के कारण नदी के किनारे जाने से कतराते थे, लेकिन अब वही नदी एक 21 वर्षीय छात्र के जुनून की कहानी बयां कर रही है। मध्य प्रदेश के ब्यावरा में रहने वाले बीएससी के छात्र सुरेंद्र सिंह चौधरी, जिन्हें सोशल मीडिया पर ‘बिट्टू तबाही’ के नाम से जाना जाता है, ने बिना किसी बड़े बजट या मशीनरी के नदी की सफाई का कार्य शुरू किया।
गणतंत्र दिवस के अवसर पर शुरू हुई उनकी यह मुहिम अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन चुकी है। नदी की सफाई से पहले और बाद की तस्वीरें वायरल होने के बाद लोगों ने सवाल उठाए, लेकिन बाद में नगरपालिका अधिकारियों ने इन तस्वीरों की पुष्टि की।
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सफाई का विचार मंदिर जाते-जाते आया
सुरेंद्र अक्सर नदी के किनारे स्थित एक मंदिर में जाते थे। वहां उन्होंने देखा कि नदी से आने वाली दुर्गंध और आसपास फैले कचरे के कारण लोग वहां से गुजरते समय नाक-मुंह सिकोड़कर निकल जाते हैं।
इसी दृश्य ने उन्हें नदी की सफाई का निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया। सुरेंद्र ने बताया कि शुरुआत में उन्होंने नदी से कचरा निकालने के लिए मशीन बनाने का विचार किया, लेकिन बजट की कमी के कारण यह संभव नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने किसी की मदद का इंतजार करने के बजाय खुद ही फावड़ा उठाया और सफाई का कार्य शुरू कर दिया।
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सफाई के दौरान आई चुनौतियाँ
सुरेंद्र ने नदी की सफाई के दौरान कई कठिनाइयों का सामना किया। सुरक्षा उपकरणों के बिना काम करने के कारण उनके हाथ-पैर में संक्रमण हो गया। सफाई के दौरान सांप भी मिले, लेकिन इन सभी परेशानियों के बावजूद उन्होंने अपना कार्य जारी रखा।
उनकी मेहनत का परिणाम धीरे-धीरे सामने आने लगा। सुरेंद्र की मुहिम को देखकर ब्यावरा नगर पालिका भी सक्रिय हुई। अब नदी में जमा पुराने कचरे, पॉलीथिन और मलबे को हटाने के लिए जेसीबी और पोकलेन मशीनों का उपयोग किया जा रहा है।
नदी में गिरने वाले नालों की समस्या
नगरपालिका के सब-इंजीनियर रूपेश कुमार नेताम के अनुसार, नदी में पांच बड़े नालों का पानी गिरता है, जो गंदगी और दुर्गंध का मुख्य कारण है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए लगभग 14.77 करोड़ रुपये की लागत से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
एक फावड़े से शुरू हुई प्रेरणादायक मुहिम
सुरेंद्र की कहानी इस बात का प्रमाण है कि बदलाव के लिए हमेशा बड़ी टीम या भारी संसाधनों की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने अकेले फावड़ा उठाकर सफाई का कार्य शुरू किया और धीरे-धीरे उनकी मुहिम ने लोगों और प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया।
हालांकि नदी को पूरी तरह साफ होने में समय लगेगा, लेकिन ‘बिट्टू तबाही’ की पहल ने शहर को यह संदेश दिया है कि बड़े बदलाव की शुरुआत अक्सर किसी एक व्यक्ति के छोटे से कदम से होती है।
