51 साल पहले भारतीय राजनीति में आपातकाल का संकट
आपातकाल की घोषणा और उसके प्रभाव
तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा की, जो 21 महीने तक चला।
नई दिल्ली : आज से 51 वर्ष पूर्व भारतीय राजनीति में एक ऐसा समय आया जिसे शायद कोई भी भारतीय भूलना चाहेगा। यह समय था आपातकाल का। 25 जून 1975 की रात को, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल की घोषणा की, जिससे यह रात भारत के लोकतांत्रिक इतिहास की सबसे विवादास्पद रातों में से एक बन गई।
आपातकाल लागू होते ही न केवल राजनीतिक दलों पर बल्कि आम नागरिकों पर भी कई प्रतिबंध लगा दिए गए। नागरिकों के मौलिक अधिकारों को सीमित कर दिया गया, प्रेस पर सेंसरशिप लागू की गई, और हजारों विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान केंद्र सरकार के पास असाधारण शक्तियां आ गईं।
आपातकाल का समय
कुल 21 माह तक चला आपातकाल
25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक, यह अवधि भारतीय लोकतंत्र की सबसे कठिन परीक्षा मानी जाती है। आपातकाल के संदर्भ में आज भी यह बहस होती है कि क्या यह देश की स्थिरता के लिए आवश्यक था या यह लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सबसे बड़ा हमला था।
आपातकाल की वजह
इसलिए लगाया गया देश में आपातकाल
आपातकाल का मुख्य कारण इलाहाबाद हाई कोर्ट का एक निर्णय था, जिसमें इंदिरा गांधी को चुनाव प्रचार में अनियमितता का दोषी ठहराया गया था। 1971 के चुनाव में इंदिरा गांधी ने बड़ी जीत हासिल की थी, लेकिन प्रतिद्वंद्वी राजनारायण ने उनकी जीत को चुनौती दी। अदालत ने इंदिरा गांधी के चुनाव को निरस्त कर दिया, जिससे देश की राजनीति में हलचल मच गई और आपातकाल की स्थिति उत्पन्न हुई।
विपक्ष की स्थिति
विपक्ष के सभी बड़े नेताओं को जेल भेजा गया
आपातकाल के दौरान देशभर में चुनाव स्थगित कर दिए गए थे। इस दौरान नागरिकों के मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए। 25 जून की रात से ही विपक्ष के नेताओं की गिरफ्तारियां शुरू हो गईं, जिसमें अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और जयप्रकाश नारायण जैसे प्रमुख नेता शामिल थे।
इतनी बड़ी संख्या में गिरफ्तारियों के कारण जेलों में जगह नहीं बची। प्रेस पर कड़ी सेंसरशिप लागू की गई, और किसी भी समाचार को प्रकाशित करने के लिए सेंसर अधिकारी की अनुमति आवश्यक थी। यदि किसी ने सरकार के खिलाफ कुछ लिखा, तो उसे गिरफ्तारी का सामना करना पड़ा। आपातकाल के दौरान प्रशासन और पुलिस ने नागरिकों को प्रताड़ित किया, जिसके कई किस्से बाद में सामने आए।
