AI वॉइस क्लोनिंग धोखाधड़ी: जानें कैसे बचें
AI वॉइस क्लोनिंग धोखाधड़ी
AI वॉइस क्लोनिंग धोखाधड़ी: देशभर में साइबर अपराधियों ने अब आम लोगों की मेहनत की कमाई लूटने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग करना शुरू कर दिया है। ये अपराधी अब फर्जी संदेश, वॉट्सऐप चैट, ई-मेल, संदिग्ध लिंक या एपीके फाइलों के माध्यम से सीधे आपके रिश्तेदारों की आवाज में कॉल कर रहे हैं। इस वॉइस क्लोनिंग तकनीक का उपयोग करके ठग लोग आपात स्थिति का बहाना बनाकर लाखों रुपये की ठगी कर रहे हैं।
नकली आवाज कैसे बनाई जाती है?
साइबर ठग आपके सार्वजनिक डेटा पर नजर रखते हैं जो आपने इंटरनेट पर साझा किया है। वे फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर आपके द्वारा पोस्ट की गई रील्स, शॉर्ट्स या वीडियो से आपकी आवाज के ऑडियो नमूने डाउनलोड करते हैं।
एआई उपकरण इन ऑडियो नमूनों का उपयोग करके बोलने के तरीके, लहजे और पिच को पूरी तरह से कॉपी कर लेते हैं। इसके बाद, अपराधी उसी नकली आवाज का उपयोग करके कॉल या वॉइस नोट तैयार करते हैं और आपके परिजनों को फोन करते हैं।
कॉल पर भरोसा न करें
यदि फोन पर कोई परिचित व्यक्ति रोते हुए तुरंत पैसे मांगता है, तो घबराएं नहीं। ठग परिजनों को सोचने का मौका नहीं देते और तुरंत ऑनलाइन ट्रांसफर का दबाव बनाते हैं।
ऐसे समय में बिना किसी क्रॉस-चेक के कोई भी वित्तीय लेनदेन न करें। हमेशा कॉल काटकर उस व्यक्ति के सामान्य मोबाइल नंबर पर दोबारा कॉल करें और स्थिति की सच्चाई की जांच करें।
सीक्रेट कोडवर्ड का नियम
इस खतरनाक धोखाधड़ी से बचने के लिए परिवार और करीबी दोस्तों के बीच एक सीक्रेट कोडवर्ड तय करना सबसे सुरक्षित तरीका है। जब भी कोई परिजन इमरजेंसी बताकर पैसे मांगता है, तो उससे वह गुप्त कोडवर्ड जरूर पूछें।
ठगी होने पर क्या करें?
यदि आप इस वॉइस क्लोनिंग धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं, तो तुरंत कार्रवाई करें। वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।
इसके अलावा, नागरिक cybercrime.gov.in पोर्टल और संचार साथी सुविधा के माध्यम से अपनी ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं। किसी भी अनजान या संदिग्ध कॉल पर केवल आवाज सुनकर पैसे भेजने की गलती न करें। #CyberSecurityAwareness #VoiceCloningScam #AIFraudAlert
