CBSE 12वीं के छात्र का विवाद: कॉपी चेकिंग में मिले कम नंबरों पर उठे सवाल
वेदांत श्रीवास्तव का विवादास्पद मामला
12वीं कक्षा के छात्र वेदांत श्रीवास्तव ने अपनी परीक्षा कॉपियों के पुनर्मूल्यांकन के बाद मिले अंक को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। उनका दावा है कि 11 प्रश्नों के पुनः जांच के बाद उन्हें केवल 2 अंक मिले हैं। हालांकि, CBSE ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि छात्र के फिजिक्स पेपर में पहले ही 9 अंक बढ़ाए जा चुके हैं। वेदांत ने एक वीडियो में बताया कि उन्होंने 11 सवालों के लिए पुनर्मूल्यांकन का आवेदन किया था, लेकिन उनके परिणाम में केवल 2 अंक बढ़े हैं, जिसमें से 1 अंक गणित और 1 अंक कंप्यूटर साइंस में शामिल है.
CBSE का स्पष्टीकरण
CBSE ने वेदांत के आरोपों को गलत बताया है। बोर्ड का कहना है कि वेदांत के फिजिक्स पेपर में पहले ही 9 अंक जोड़े गए थे। इसके अलावा, CBSE ने यह भी जानकारी दी है कि 12वीं कक्षा के पुनर्मूल्यांकन के लिए प्राप्त 99.7 प्रतिशत आवेदनों पर कार्य पूरा कर लिया गया है, और शेष कॉपियों की जांच भी जल्द ही समाप्त हो जाएगी.
वेदांत का पुनः स्पष्टीकरण
CBSE के उत्तर के बाद, वेदांत ने अपनी बात को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि फिजिक्स में जो 9 अंक बढ़ाए गए हैं, वे पुनर्मूल्यांकन से नहीं मिले हैं। उनके अनुसार, ये अंक उनके वास्तविक अंक थे, जो पहले बोर्ड द्वारा नहीं दिए गए थे क्योंकि उनकी फिजिक्स की असली कॉपी बदल दी गई थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकारी प्रक्रिया के तहत उन्हें केवल वही 2 अंक मिले हैं जिनका उन्होंने पहले उल्लेख किया था.
मामले की शुरुआत
यह मामला 13 मई को 12वीं कक्षा के परिणाम के बाद शुरू हुआ। 19 मई को वेदांत ने देखा कि उन्हें फिजिक्स में अपेक्षा से कम अंक मिले हैं। जब उन्होंने अपनी कॉपी की फोटोकॉपी निकलवाई, तो पता चला कि वह कॉपी उनकी नहीं थी। इसके बाद, 23 मई को वेदांत ने ट्विटर पर अपनी समस्या साझा की। उन्होंने बताया कि उन्होंने पूरे साल मेहनत की थी, लेकिन अब उन्हें यह भी नहीं पता कि क्या उनकी असली कॉपी की जांच हुई थी या नहीं.
राजनीतिक प्रतिक्रिया
जब वेदांत ने अपनी बात साझा की, तो उन्हें काफी ट्रोल किया गया। इस मामले में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी हस्तक्षेप किया। उन्होंने वेदांत का समर्थन करते हुए कहा कि एक 17 वर्षीय लड़के को न्याय मांगने पर ट्रोल किया गया और बीजेपी की आईटी सेल ने उन्हें 'राष्ट्र-विरोधी' और 'पाकिस्तानी' जैसे गलत नामों से संबोधित किया.
